जयपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जयपुर प्रांत प्रचारक बाबूलाल ने देश की जनसांख्यिकी (Demography) और सांस्कृतिक सुरक्षा को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत को दीर्घकाल तक ‘युवा’ बनाए रखने के लिए हमारी पारंपरिक परिवार व्यवस्था को सुदृढ़ करना बेहद अनिवार्य है। इसके लिए प्रत्येक परिवार में कम से कम तीन संतानें होनी चाहिए। प्रांत प्रचारक ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान दौर में हमें एकल परिवारों के चलन को छोड़कर संयुक्त परिवारों (Joint Families) की अपनी पुरातन मर्यादाओं को पुनर्जीवित करना होगा, क्योंकि मजबूत परिवार ही हमारी सनातन संस्कृति और देश के अस्तित्व को सुरक्षित रख सकते हैं।

भेदभाव मुक्त समरस समाज और स्वत्व जगाने का आह्वान
वे शुक्रवार को जामडोली स्थित दामोदर दास डालमिया आदर्श विद्या मंदिर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘संघ शिक्षा वर्ग’ (प्रशिक्षण शिविर) के समापन समारोह को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। सामाजिक समरसता पर बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जाति, भाषा, खान-पान या पूजा पद्धति के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव करना हमारी सनातन परंपरा का हिस्सा नहीं है। हमें हर मनुष्य को मनुष्य के रूप में स्वीकार कर एक समरस और एकजुट समाज का निर्माण करना होगा। उन्होंने नागरिकों से अपने ‘स्वत्व’ को जाग्रत करने की अपील करते हुए स्वदेशी उत्पादों, अपनी मातृभाषा और पारंपरिक वेशभूषा को दैनिक जीवन में अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इन व्यक्तिगत और पारिवारिक प्रयासों के बल पर ही भारत पुनः ‘विश्व गुरु’ के पद पर प्रतिष्ठित हो सकेगा।
बढ़ते कार्बन उत्सर्जन और एसी (AC) के अत्यधिक उपयोग पर जताई चिंता
अपने संबोधन में प्रांत प्रचारक ने बिगड़ते पर्यावरण और जल संकट की स्थिति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने समाज को प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण और सीमित उपयोग की सीख दी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज वातानुकूलित (AC) उपकरणों का अत्यधिक और अंधाधुंध उपयोग पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन को तेजी से बढ़ा रहा है, जिसे नियंत्रित करना वैश्विक और व्यक्तिगत स्तर पर आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने सभी स्वयंसेवकों और नागरिकों से देश के संवैधानिक नियमों व नागरिक कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन करने का संदेश दिया।
संघ ने सनातन समाज को एक सूत्र में बांधा: संत बस्तीनाथ
समापन समारोह की अध्यक्षता कर रहे नाथ संप्रदाय के पूज्य संत बस्तीनाथ ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर बिखर रहे सनातन समाज को वैचारिक और व्यावहारिक रूप से संगठित करने का ऐतिहासिक कार्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने किया है। संघ ने भारत की भौगोलिक सीमाओं को एक सूत्र में पिरोते हुए सनातन संस्कृति की जड़ों को पाताल तक मजबूत करने का काम किया है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त मेजर जनरल तेजिंदर आहलुवालिया ने वर्ग में स्वयंसेवकों द्वारा किए गए हैरतअंगेज शारीरिक प्रदर्शन और अनुशासित विन्यास की सराहना की। उन्होंने युवाओं को जीवन के हर क्षेत्र में ईमानदारी, अनुशासन और निष्पक्षता के साथ राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा दी।
24 जिलों के 316 तरुणों ने पूरा किया कड़ा सैन्य सदृश प्रशिक्षण
गौरतलब है कि जयपुर प्रांत के 24 जिलों के महाविद्यालयीन विद्यार्थियों (College Students) और युवा व्यवसायियों के लिए आयोजित यह विशेष प्रशिक्षण वर्ग गत 21 मई 2026 को शुरू हुआ था, जिसका शुक्रवार को भव्य समापन हुआ। इस कड़े आवासीय शिविर में कुल 316 शिक्षार्थियों ने अपना प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण किया। वर्ग की व्यवस्था और शिक्षण के लिए 37 शारीरिक शिक्षकों तथा 42 प्रबंधकों ने 15 दिनों तक पूर्णकालिक रूप से अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन करने के लिए संघ के अखिल भारतीय सह-प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर तथा अखिल भारतीय सह-प्रचारक प्रमुख अरुण जैन का भी विशेष प्रवास रहा, जिन्होंने विभिन्न सत्रों में शिक्षार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
