‘बिना कमीशन नहीं पास होती फाइल’: करौली में सरपंच और अधिकारियों की मिलीभगत से बड़ा भ्रष्टाचार, वायरल ऑडियो से खुली पोल

करौली। राजस्थान के करौली जिले की गांवड़ी मीना ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार का एक ऐसा बड़ा खेल उजागर हुआ है, जिसने पूरे प्रशासनिक सिस्टम और पंचायती राज व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि ग्राम विकास अधिकारी (VDO), सरपंच और जिला परिषद के अधिकारियों की आपसी मिलीभगत से पिछले 5 सालों में करोड़ों रुपये का सरकारी धन लूटा गया है। इस मामले में एक ऑडियो भी वायरल हुआ है, जिसने “कमीशन गेम” की पूरी पोल खोल कर रख दी है। परिवादी भूरसिंह ने इस पूरे महाघोटाले का पर्दाफाश करते हुए जिला कलेक्टर से न्याय और निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है।

नरेगा में बड़ा फर्जीवाड़ा: 95% ग्रामीणों को लाभ नहीं

आरोपों के अनुसार, महात्मा गांधी नरेगा योजना में जमकर धांधली की गई है:

  • फर्जी मस्टर रोल: गांव में केवल 5% वास्तविक लोगों को काम मिला, जबकि 95% पैसा फर्जी तरीके से उठाया गया।
  • परिजनों के नाम पर जॉब कार्ड: सरपंच ने अपने रिश्तेदारों, बाहर रहकर पढ़ाई या नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों और गांव में न रहने वाले लोगों के नाम पर कागजों में मजदूर दिखाकर लाखों रुपये निकाल लिए।
  • पासबुक और ATM पर कब्जा: आरोप है कि बिना काम किए उपस्थिति दर्ज की गई और मजदूरों की बैंक पासबुक व एटीएम कार्ड सरपंच के पास ही रहते थे। एक ही परिवार को बार-बार फायदा पहुंचाया गया।

कागजों में विकास: नाली गायब, लाइब्रेरी का अता-पता नहीं

निर्माण कार्यों में भी भारी हेराफेरी सामने आई है:

  • इंटरलॉकिंग सड़क व नाली घोटाला: कागजों में “नाली सहित सड़क” का बिल पास करा लिया गया, लेकिन जमीन पर सिर्फ सड़क बनी है, नाली का नामोनिशान नहीं है। हर साल सफाई और मरम्मत के नाम पर भी पैसे उठाए गए।
  • सोक पिट और शौचालय: कागजों में 62 सोक पिट (गड्ढे) बनाए गए, जबकि मौके पर सिर्फ 4-5 ही मिले। एक ही शौचालय के नाम पर कई बार भुगतान उठाया गया।
  • लाइब्रेरी के नाम पर लूट: गांव में लाइब्रेरी निर्माण के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखा दिए गए, जबकि हकीकत में मौके पर कुछ नहीं है।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना: इस योजना में भी लाभार्थियों से 20-30 हजार रुपये की अवैध वसूली की गई। काम किसी और ने किया और भुगतान किसी अन्य के नाम पर उठा लिया गया।

वायरल ऑडियो ने खोली ‘कमीशन गेम’ की पोल

कथित वायरल ऑडियो

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खुलासा एक वायरल ऑडियो से हुआ है। यह ऑडियो सरपंच प्रतिनिधि नाहर सिंह और भाजपा मंडल अध्यक्ष (महावीर जी) कपिलेश के बीच हुई बातचीत का बताया जा रहा है।

  • ऑडियो में साफ सुनाई दे रहा है कि 10 लाख रुपये के काम पर 20 हजार रुपये का फिक्स कमीशन लिया जा रहा है।
  • बातचीत में यह भी कबूला गया है कि बिना कमीशन दिए कोई भी फाइल पास नहीं होती है।

‘CEO साहब की मेहरबानी’ और अधिकारियों की भूमिका

वायरल ऑडियो में साफ हो रहा है कि इस पूरे भ्रष्टाचार में जिला परिषद के कार्यवाहक CEO लखन सिंह की बड़ी “मेहरबानी” है। लखन सिंह लंबे समय से करौली जिले में जमे हुए हैं। वे पहले हिंडौन पंचायत समिति में विकास अधिकारी रहे और वर्तमान में करौली में ACE0 पद पर तैनात हैं। हाल ही में तत्कालीन CEO शिवचरण मीणा के रिटायरमेंट के बाद उन्हें कार्यवाहक CEO का चार्ज भी दे दिया गया। इस खुलासे के बाद यह मांग उठने लगी है कि अगर जिले की 11 पंचायत समितियों के अधीन आने वाली 309 ग्राम पंचायतों की निष्पक्ष जांच हो, तो भ्रष्टाचार के कई और बड़े मामले सामने आ सकते हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस करोड़ों के घोटाले की निष्पक्ष जांच करेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी, या फिर सिस्टम में बैठे रसूखदार लोग हमेशा की तरह बच निकलेंगे?

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