शीर्ष से सलाखों तक, कर्मों के ‘चक्रव्यूह’ में फंसे पूर्व महाबली…!

कहते हैं कि वक्त का पहिया जब घूमता है तो महलों के ठाठ पलभर में तिनके की तरह बिखर जाते हैं। आज देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा के एक पूर्व पावरफुल ‘सिपहसालार’ की कहानी इसी शाश्वत सत्य का जीवंत और मर्मभेदी दस्तावेज बन चुकी है। एक वक्त था जब इनके एक इशारे पर सचिवालय के गलियारों से लेकर महकमे के सारे लोग लाइन से खड़े हो जाते थे और एक्शन पर पानी मांगने लगते थे। एक वक्त था जह इनके घर और ऑफिस पर बड़ी-बड़ी कंपनियों के लोग और रसूखदार घंटों इंतजार करते थे। लेकिन, अब इसे नियति का खेल कहें या फिर प्रदेश का सबसे बड़ा बाबू बनने की चाह और पैसों की भूख; ‘सुपर बॉस’ बने ‘साहब’ ने एक महकमे में पैसों के लालच और ‘सबसे बड़े बाबू’ की कुर्सी के लिए कई बड़े-बड़े कांड कर दिए। समय बदला तो सबसे पहले उनकी पावर उनसे दूर हो गई और बर्फ में लग गए। रिटायरमेंट के बाद खुशहाल जिंदगी जीने की चाह में रोड़े पड़ गए और महीनों की फरारी के बाद आखिरकार श्रीकृष्णजी की ‘जन्मस्थली’ में पहुंच गए।
प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि यह पूर्व शीर्ष नौकरशाह वर्तमान में श्रीकृष्ण की ‘जन्मस्थली’ से जुड़ी संकरी दीवारों के बीच बेहद परेशान और बेबस हैं! उन्हीं संकरी दीवारों में इस अधिकारी का आत्ममंथन तैर रहा है! उनका दिन अब श्लोकों के जाप, धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन और मौन प्रार्थनाओं में बीत रहा है! महकमे के जिन अधिकारियों के साथ किए गए कांडों पर अब पश्चाताप भी होता है लेकिन अब क्या कर सकते हैं! पीछे के अतीत के उन कारनामों की गूंज साफ सुनाई देती है जिन्होंने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। कभी बैग और सूटकेस का वजन उन्हें जितना सुकून देता था, आज जेल की दीवारें उतनी ही ज्यादा परेशान कर रही है! भ्रष्टाचार के जिन मामलों ने पूरे महकमे की साख को बट्टा लगाया था, आज उन फाइलों के पन्ने अदालत और जांच एजेंसियों के सामने चीख-चीखकर उनके पुराने फैसलों की पोल खोल रहे हैं!
जब पद और मद का नशा सिर पर चढ़कर बोलता है, तब इंसान भूल जाता है कि हर गलत फैसले की एक एक्सपायरी डेट होती है। आलीशान बंगले, लक्जरी गाड़ियां और करोड़ों की कमाई भी उस वक्त इंसान को नहीं बचा पाते जब कानून का डंडा चलता है। अब जेल की वीरान दीवारों और काटने को दौड़ते लंबे एकांत के बीच अक्सर उनके लबों से एक ही बेबस जुमला फूटता है- ‘भगवान किसी को भी जेल का कैदी न बनाए’। यह महज एक वाक्य नहीं बल्कि उस आत्मा की चीख है जो अपनी खोई हुई आजादी और धूमिल हो चुकी प्रतिष्ठा के मलबे पर बैठकर अपने अतीत के फैसलों को टटोल रही है!

Expose बाबू

Share This Article
Leave a Comment