एक सरकारी महकमे में ‘मुखियाजी’ की ठेकेदारी से ज्यादा उनकी एक ‘यारी’ की इन दिनों खूब चर्चाएं हो रही है। वागड़ का यह ठेकेदार ‘रत्न’ कई खूबियों के चलते अन्य ठेकेदारों से एकदम अलग है… और जबसे ‘वागड़’ का ‘मेवाड़’ से संगम हुआ है, तब से तो इस ‘रत्न’ की ‘खनखनाहट’ ही अलग हो गई। इसी क्वालिटी की वजह से पिछली सरकार के अंतिम 2 साल में महकमे के पूरे मेवाड़ संभाग की जिम्मेदारी इसी वागड़ ‘रत्न’ को मिली हुई थी। वागड़ और मेवाड़ के संगम से ‘पावरफुल’ बने इस ‘रत्न’ ने पिछले ‘मुखियाजी’ को ‘मालामाल’ कर दिया था लेकिन इस दौरान कुछ एजेंसियों के निशाने पर आने के बाद वागड़ ‘रत्न’ ने खुद को पर्दे से गायब कर दिया। एजेंसियों से लेकर बाकी खामियों को दुरस्त करने में इस वागड़ ‘रत्न’ को काफी ‘हीरे-मोती’ लुटाने पड़े। अपने कुछ खास शुभचिंतकों की सलाह पर वागड़ ‘रत्न’ ने खुद को महकमे के पर्दे से पूरी तरह गायब कर दिया।
‘नए मुखियाजी’ के आने के बाद मौसम और हालात देखकर वागड़ ‘रत्न’ फिर से पूरी तरह सक्रिय हो गए। सावधानी के लिए महकमे के पर्दे से पूरी तरह गायब। न महकमे में आना-जाना और न ही अधिकारियों से मिलना-जुलना। अब वागड़ ‘रत्न’ सिर्फ ‘मुखियाजी’ और उनकी कोर टीम के लोगों से ही मिलते हैं और वो भी पूरी सावधानी से, कुछ खास ‘ठिकानों’ पर। इतना ही नहीं, वागड़ ‘रत्न’ ने अपने विरोधियों से बचने के लिए नई सरकार में अपनी फर्म पर महकमे में नए काम भी बंद कर दिए हैं। अब वागड़ ‘रत्न’ महकमे में किसी दूसरी फर्म के नाम पर काम लेते हैं और उन कामों में अपने रिश्तेदारों के ‘छद्म’ नाम की फर्मों को 2 नंबर से ‘एंट्री’ करवाकर काम कर रहे हैं।
वागड़ ‘रत्न’ के इस नवीन प्रयोग में ‘मुखियाजी’ भी ‘छद्म’ पार्टनर है और पर्दे के पीछे से उनकी पूरी मेहरबानी या फिर पूरी ठेकेदारी चल रही है। वैसे, ‘मुखियाजी’ का ‘मेवाड़’ से इन 2 सालों में गहरा रिश्ता हो गया है। यूं कह लिजिए कि ‘मुखियाजी’ का अब सबसे ज्यादा मन ‘मेवाड़’ में ही लगता है। इसके पीछे की कहानी भी समझने वाले समझ ही गए हैं और जो नहीं समझ पाएं है वो भी धीरे-धीरे समझ जाएंगे। इस कहानी के अंत में इतना ही कहेंगे कि आने वाले दिनों में ‘मुखियाजी’ को ये वागड़ ‘रत्न’ की दोस्ती और ‘मेवाड़’ से लगाव कोई बड़ा ‘ताडंव’ मचाएगा!
Expose बाबू