देश की सुरक्षा में अडानी का सबसे बड़ा दांव: डिफेंस सेक्टर में 1.8 लाख करोड़ के निवेश का प्लान; AI और ड्रोन तकनीक पर होगा फोकस

नई दिल्ली: भारतीय रक्षा क्षेत्र (Defense Sector) में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा कदम उठने जा रहा है। दिग्गज कारोबारी गौतम अडानी की अगुवाई वाला अडानी ग्रुप (Adani Group) अगले साल (2026) डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये (1.8 Trillion) का भारी-भरकम निवेश करने की तैयारी कर रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, इस महा-निवेश का मुख्य उद्देश्य भारत की स्वदेशी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना और भविष्य के युद्धों (Future Warfare) के लिए तैयार होना है।

क्या है अडानी का ‘मास्टरप्लान’? रिपोर्ट्स के अनुसार, अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस (Adani Defence & Aerospace) अब पारंपरिक हथियारों से आगे बढ़कर नेक्स्ट-जेन टेक्नोलॉजी पर फोकस करेगा। 1.8 लाख करोड़ रुपये के इस निवेश में इन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी:

  1. मानवरहित सिस्टम (Unmanned Systems): हवा, पानी और जमीन पर चलने वाले ड्रोन और रोबोटिक सिस्टम।
  2. गाइडेड हथियार (Guided Weapons): सटीक निशाना लगाने वाले आधुनिक मिसाइल सिस्टम।
  3. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): युद्ध में एआई-आधारित मल्टी-डोमेन ऑपरेशन।
  4. MRO और ट्रेनिंग: हथियारों के रखरखाव, मरम्मत और ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में दिखा दम सूत्रों ने बताया कि साल 2025 अडानी डिफेंस के लिए एक निर्णायक साल रहा। कंपनी ने लंबी योजना प्रक्रियाओं (Planning Cycles) से निकलकर ‘रैपिड डिप्लॉयमेंट’ (त्वरित तैनाती) की नीति अपनाई। खबर है कि अडानी द्वारा बनाए गए कुछ सैन्य हार्डवेयर और उपकरणों का उपयोग हालिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) में भी किया गया, जहां उन्होंने अपनी क्षमता साबित की।

हवा से लेकर समुद्र तक निगरानी अडानी ग्रुप की योजना तीनों सेनाओं (जल, थल, वायु) के लिए अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने की है:

  • हवा में: खुफिया निगरानी (ISR) और संचार के लिए लंबी दूरी तक उड़ने वाले UAVs (जैसे दृष्टि-10)।
  • समुद्र में: पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare) और माइन काउंटरमेजर्स के लिए मानवरहित सतह और पानी के नीचे चलने वाले वाहन (UUVs)।
  • जमीन पर: रसद आपूर्ति और सीमा सुरक्षा के लिए मानवरहित जमीनी वाहन (UGVs)।

भारत बनेगा डिफेंस हब गौरतलब है कि अडानी डिफेंस ने हाल ही में कानपुर में दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा गोला-बारूद कॉम्प्लेक्स शुरू किया था। अब 1.8 लाख करोड़ के इस नए निवेश से भारत न केवल अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि दुनिया के नक्शे पर एक प्रमुख रक्षा निर्यातक (Defense Exporter) बनकर भी उभरेगा।

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