करौली मेडिकल कॉलेज के फरमान से मचा हड़कंप: 50-60 संविदा कर्मियों की सेवा समाप्त, दर्जनों परिवारों पर आजीविका का संकट

करौली। करौली जिला मुख्यालय पर स्थित नवनिर्मित मेडिकल कॉलेज से एक ऐसा संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने दर्जनों परिवारों की रातों की नींद उड़ा दी है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य द्वारा आज दोपहर जारी किए गए एक औचक आदेश ने अस्पताल में पिछले कई वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे करीब 50 से 60 संविदा कार्मिकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इस अचानक आए फैसले से प्रभावित कर्मचारियों के पैरों तले से जमीन खिसक गई है और उनके सामने अपने परिवार के भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

कई वर्षों से दे रहे थे सेवाएं, अचानक थमाया आदेश

हटाए गए कर्मियों में राजकीय चिकित्सालय के महत्वपूर्ण विभागों का स्टाफ शामिल है। इनमें कई वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे:

  • लैब टेक्नीशियन
  • ब्लड बैंक टेक्नीशियन
  • नर्सिंग स्टाफ व अन्य संविदा कर्मी शामिल हैं।

आज दोपहर जब प्राचार्य के हस्ताक्षर युक्त सेवा समाप्ति का आदेश इन कार्मिकों के हाथ में पहुंचा, तो सभी भौचक्के रह गए। अस्पताल के अलग-अलग वार्डों और जांच प्रयोगशालाओं में अचानक चिंता और मायूसी का माहौल छा गया।

मरीजों पर फूटा गुस्सा, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

संविदा कार्मिकों को अचानक हटाए जाने का सीधा असर अस्पताल की व्यवस्थाओं पर देखने को मिल रहा है। कार्मिकों के काम बंद करने और एकत्रित होकर विरोध दर्ज कराने के कारण अस्पताल में आने वाले मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

अस्पताल से मिली रिपोर्ट: लैब और ब्लड बैंक में तकनीशियनों के न होने से मरीजों की जरूरी जांचें अटक गई हैं। वहीं, भर्ती मरीजों की देखरेख और इलाज में भी भारी परेशानी आ रही है।

सोशल मीडिया पर बहाली की गुहार, बजट घोषणा के उल्लंघन का आरोप

आदेश जारी होने के बाद सभी पीड़ित कार्मिकों ने एकत्रित होकर एकजुटता दिखाई। वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे व्हाट्सएप (WhatsApp) और ट्विटर/एक्स (X) के माध्यम से सरकार और उच्च अधिकारियों तक अपनी आवाज पहुंचा रहे हैं और सेवा बहाली की मांग कर रहे हैं।

कार्मिकों का कहना है कि राज्य सरकार ने बजट घोषणा 2025 में यह वादा किया था कि एक राजकीय संस्था (सरकारी निकाय) का गठन करके इन सभी संविदा कर्मियों को उसमें नियोजित (समायोजित) किया जाएगा। सरकार के इस वादे के ठीक विपरीत, करौली मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा सेवा समाप्ति का यह आदेश निकालना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है और इससे संविदा कर्मियों में भारी रोष व्याप्त है।

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