जयपुर: राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जयपुर नगर निगम के एक स्वास्थ्य निरीक्षक (एसआई) और एक निजी दुकानदार को रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया है। परिवादी से उसकी रुकी हुई सैलरी बनाने की एवज में रिश्वत की मांग की गई थी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वार्ड नंबर 99 (पूर्व में परिसीमन से पहले वार्ड 36) के सफाई कर्मचारी भवानीशंकर चावला (23 वर्ष) की शिकायत पर दर्ज किया गया है।
- परिवादी ने 17 मार्च 2026 को एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी कि नगर निगम के सिविल लाइन जोन में कार्यरत स्वास्थ्य निरीक्षक दिनेश कुमार उसकी उपस्थिति और सैलरी तभी बनाएगा जब उसे रिश्वत दी जाएगी।
- शिकायत के अनुसार, आरोपी दिनेश कुमार हर महीने की सैलरी बनाने के लिए रेलवे स्टेशन के पास स्थित ‘प्रकाश होजरी’ के दुकानदार प्रकाशचन्द के माध्यम से रिश्वत की मांग करता था और उसी के मार्फत लेन-देन करता था।
15 हजार रुपये की थी मांग
एसीबी ने डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर के माध्यम से शिकायत का कई चरणों में सत्यापन किया। जांच के दौरान यह सामने आया कि एसआई दिनेश कुमार ने परिवादी की मार्च, अप्रैल और मई 2026 की बकाया सैलरी बनाने के लिए 5,000 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से कुल 15,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी।
पढ़े पूरी FIR…
एसीबी का ट्रैप और कार्रवाई
14 मई 2026 को एसीबी के पुलिस निरीक्षक छोटीलाल के नेतृत्व में ट्रैप की योजना बनाई गई।
- परिवादी भवानीशंकर 5,000 रुपये लेकर वार्ड नंबर 99 के कार्यालय पहुंचा।
- कार्यालय में दिनेश कुमार ने उसे डांटा और कहा कि सारा समाधान दुकानदार प्रकाश के पास है, उसी से जाकर मिलो।
- जब परिवादी ने दुकानदार प्रकाश को 5,000 रुपये दिए, तो इशारा मिलते ही एसीबी टीम ने प्रकाशचन्द को दबोच लिया।
- एसीबी ने प्रकाशचन्द के दाहिने हाथ से 500-500 रुपये के 10 नोट (कुल 5,000 रुपये) बरामद किए।
- सोडियम कार्बोनेट के घोल में प्रकाशचन्द के हाथ धुलवाने पर घोल का रंग गुलाबी हो गया, जिससे रिश्वत लेने की वैज्ञानिक पुष्टि हो गई।
दोनों आरोपी गिरफ्तार
एसीबी ने कार्रवाई करते हुए 58 वर्षीय स्वास्थ्य निरीक्षक दिनेश कुमार और 54 वर्षीय दलाल (दुकानदार) प्रकाशचन्द को गिरफ्तार कर लिया है। मौके से आरोपियों के मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 7A, 12 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 61(2) के तहत एफआईआर (FIR No. 0130) दर्ज की गई है। मामले की आगे की जांच का जिम्मा पुलिस उप अधीक्षक सुरेश कुमार स्वामी को सौंपा गया है।
