अजमेर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की सबसे प्रतिष्ठित और बड़ी परीक्षा ‘राजस्थान प्रशासनिक एवं अधीनस्थ सेवाएं’ (RAS) में एक बड़ा और दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी शहरी युवाओं का गढ़ मानी जाने वाली इस सेवा में अब ग्रामीण परिवेश के अभ्यर्थियों ने अपना परचम लहरा दिया है। हाल ही में संपन्न हुई आरएएस भर्ती-2024 के अंतिम परिणामों का विश्लेषण करें तो साफ होता है कि गांवों के युवाओं ने शहरी क्षेत्रों को पछाड़ते हुए 52.36 प्रतिशत सीटों पर कब्जा जमाया है। यह कोई एक बार का संयोग नहीं है, बल्कि पिछली लगातार दो-तीन भर्तियों से ग्रामीण युवाओं का ग्राफ तेजी से ऊपर की ओर बढ़ रहा है।
आंकड़ों की जुबानी: कैसे पलटा सफलता का पासा
अगर पिछले एक दशक के आंकड़ों पर नजर डालें, तो आरएएस भर्ती में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का अनुपात पूरी तरह उलट चुका है। साल 2012 में जहां ग्रामीण क्षेत्रों से महज 22% अभ्यर्थी चयनित हुए थे, वहीं अब यह आंकड़ा आधे से अधिक हो चुका है।
- आरएएस 2024: कुल अनुशंसित 2,391 अभ्यर्थियों में से 1,255 (52.36%) ग्रामीण पृष्ठभूमि के हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों से 1,136 अभ्यर्थी ही जगह बना पाए हैं।
- आरएएस 2023: कुल 2,166 अभ्यर्थियों में से 1,210 (55.86%) ग्रामीण और 956 (44.14%) शहरी पृष्ठभूमि के थे।
पिछले वर्षों का तुलनात्मक ग्राफ:
| भर्ती वर्ष | कुल पद | शहरी क्षेत्र का चयन | ग्रामीण क्षेत्र का चयन |
| आरएएस 2012 | 1211 | 937 | 274 |
| आरएएस 2013 | 723 | 505 | 218 |
| आरएएस 2016 | 725 | 513 | 212 |
| आरएएस 2018 | 1051 | 651 | 400 |
| आरएएस 2021 | 988 | 566 | 422 |
युवाओं और शैक्षणिक योग्यता का बढ़ा दबदबा
आरएएस भर्ती में न केवल भौगोलिक पृष्ठभूमि बदल रही है, बल्कि अब कम उम्र के और बेहद उच्च शिक्षित युवा इस सेवा की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उम्र के लिहाज से इस बार परीक्षा में 21 से 30 वर्ष के युवाओं का कुल दबदबा 67.42 प्रतिशत रहा है।
- 21 से 25 वर्ष: 725 अभ्यर्थी (30.25%)
- 26 से 30 वर्ष: 891 अभ्यर्थी (37.17%)
- 31 से 40 वर्ष: 709 अभ्यर्थी (29.58%)
- 41 से 50 वर्ष: 72 अभ्यर्थी (3.01%)
इसके साथ ही, चयनित होने वाले अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता में भारी बढ़ोतरी हुई है। साल 2024 के साक्षात्कार तक पहुंचे 2,397 अभ्यर्थियों में से करीब 1,888 अभ्यर्थी ग्रेजुएशन स्तर पर प्रथम श्रेणी (First Division) से पास थे। इसके अलावा, 39.60 प्रतिशत अभ्यर्थी पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) हैं। इस बार प्रशासनिक अधिकारी बनने वालों में 14 डॉक्टर, 15 एलएलबी-एलएलएम डिग्रीधारी, 10 एमबीए और 238 प्रोफेशनल इंजीनियर शामिल हैं।
विशेषज्ञ की राय: क्यों गांवों के युवा शहरी प्रतिभाओं को दे रहे हैं मात?
महरूषी दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (MDSU) के जूलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. सुभाषचंद्र ने इस बदलते ट्रेंड पर गहरा विश्लेषण साझा किया है। उनका मानना है कि यह बदलाव प्राथमिकताओं और अवसरों के अंतर के कारण है।
प्रो. सुभाषचंद्र ने बताया:
“शहरी इलाकों के युवाओं के पास ग्रेजुएशन के बाद सरकारी नौकरी के अलावा कई अन्य आकर्षक विकल्प मौजूद होते हैं। वे कॉरपोरेट सेक्टर में बड़े पैकेज वाली नौकरियां, अपना खुद का व्यापार या नए स्टार्टअप्स की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। इसके विपरीत, ग्रामीण इलाकों में आज भी संसाधनों की कमी है और वहां निजी क्षेत्र के विकल्प न के बराबर हैं। ऐसे में ग्रामीण युवाओं के लिए एक सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर भविष्य के रूप में ‘सरकारी नौकरी’ ही सबसे बड़ा और बेहतरीन माध्यम नजर आती है। यही कारण है कि गांवों की प्रतिभाएं पूरी ताकत और कठिन मेहनत के साथ आरएएस जैसी बड़ी परीक्षाओं की तैयारी में जुट रही हैं और लगातार आगे बढ़ रही हैं।”
