सड़क सुरक्षा के लिए सरकार की सख्ती: हाईवे के दोनों ओर 75 मीटर में निर्माण अवैध, ढाबा-होटल संचालकों की बढ़ी बेचैनी

जयपुर। राजस्थान सरकार द्वारा हाईवे और स्टेट हाईवे के आसपास भूमि उपयोग को लेकर लागू किए गए नए नियमों ने राजधानी जयपुर के ग्रामीण क्षेत्रों के प्रॉपर्टी बाजार का गणित बिगाड़ दिया है। नई गाइडलाइन के तहत हाईवे के दोनों ओर 75-75 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण को अवैध घोषित कर दिया गया है। इस फैसले के बाद से हाईवे के किनारे जमीनों की खरीद-फरोख्त लगभग पूरी तरह से थम गई है।

सर्वाधिक प्रभावित प्रमुख राजमार्ग:

  • जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH)
  • जयपुर-टोंक राष्ट्रीय राजमार्ग (NH)
  • जयपुर-गंगापुर स्टेट हाईवे (SH)

प्रॉपर्टी बाजार में छाई सुस्ती, भावों में गिरावट

बस्सी क्षेत्र सहित जयपुर के आस-पास के कई इलाकों में जमीनों के भाव तेजी से गिरने लगे हैं। नई गाइडलाइन लागू होने के बाद हाईवे के किनारे प्लॉट या जमीन खरीदना अब जोखिम भरा माना जा रहा है। प्रॉपर्टी कारोबारियों का कहना है कि नियम लागू होने की भनक लगते ही बाजार में मंदी आ गई है और कई करोड़ों के सौदे बीच में ही रुक गए हैं।

कुछ भू-कारोबारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्होंने हाईवे के किनारे ऊंची कीमतों पर भारी निवेश कर रखा था, लेकिन अब जमीन बिक नहीं रही है। खरीददार न मिलने के कारण उन पर गहरा आर्थिक संकट मंडराने लगा है। कुछ मामलों में तो पहले से तय हो चुके सौदे (Agreements) भी निरस्त हो गए हैं।

सरकार ने क्यों लागू किया यह नियम?

विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह व्यवस्था मुख्य रूप से सड़क सुरक्षा और भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखकर लागू की गई है।

  • सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण: हाईवे किनारे अनियोजित और अवैध निर्माण के कारण दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा था।
  • सड़क चौड़ीकरण: भविष्य में ट्रैफिक बढ़ने पर सड़कों के चौड़ीकरण में इन अवैध निर्माणों के कारण भारी बाधाएं आती हैं। अब प्रशासन सख्ती से इन नियमों की पालना करवाने की तैयारी में है। 75 मीटर के दायरे में आने वाले किसी भी नए निर्माण को तुरंत प्रभाव से ध्वस्त किया जा सकता है।

होटल और ढाबा संचालकों की उड़ी नींद

हाईवे किनारे वर्तमान में संचालित होटल, ढाबा और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों में भी भारी बेचैनी देखी जा रही है। उन्हें डर है कि भविष्य में प्रशासन की सख्ती बढ़ने पर उनके मौजूदा निर्माणों पर भी बुलडोजर चल सकता है। इस खौफ के चलते लोग अब हाईवे किनारे किसी भी तरह के नए व्यावसायिक निर्माण से बच रहे हैं।

निवेशकों ने बदली रणनीति, बढ़ा दी सतर्कता

इस नई नीति से सबसे ज्यादा वे लोग प्रभावित हुए हैं, जिन्होंने हाल ही में निवेश किया है या हाईवे किनारे प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बना रहे थे। अब कोई भी निवेशक बिना पूरी जांच-पड़ताल के पैसा लगाने को तैयार नहीं है।

अब निवेशक इन बातों पर दे रहे हैं विशेष ध्यान:

  1. मास्टर प्लान की स्थिति।
  2. भूमि उपयोग (Land Use) और ग्रीन कवर (Green Cover) के नियम।
  3. राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) की बारीकी से जांच।

कुल मिलाकर, सरकार की इस नई गाइडलाइन ने हाईवे किनारे जमीन बाजार की तस्वीर को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। एक ओर जहां निवेशकों की सतर्कता बढ़ गई है, वहीं दूसरी ओर प्रॉपर्टी डीलर्स और जमीन मालिकों के सामने अपना निवेश बचाने की नई चुनौती खड़ी हो गई है।

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