-करोड़ों का ‘स्काडा’ सिस्टम लगाया ही नहीं, फिर भी अफसरों की मिलीभगत से कंपनी उठाती रही अधूरे कार्य के O&M का फर्जी भुगतान
-2021 में भी कंपनी को फर्जीवाड़े के मामलों में चेतावनी देकर छोड़ दिया था, लेकिन नई निविदाओं में फिर लगा दिया बिडिंग कैपेसिटी का झूठा शपथ पत्र
-RTPP एक्ट की धज्जियां उड़ाकर 2% EMD जप्त करने और डीबार करने की बजाय पीछे के रास्ते से फर्म को किया ‘सेफ एग्जिट’
-भ्रष्टाचार के इस ‘त्रिकोणीय खेल’ में कंपनी के साथ 3 ACE’s की मिलीभगत हुई उजागर, कंपनी के साथ सांठगांठ कर सरकार को पहुंचाया करोड़ों का वित्तीय नुकसान
जयपुर। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में भ्रष्टाचार और चहेती फर्मों को उपकृत करने का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत करोड़ों रुपए के कार्यों की निविदाओं में एक बड़ा कूट रचित खेल सामने आया है। विभाग के आला अधिकारियों ने मिलकर एक ऐसी डिफाल्टर ठेका कंपनी को संरक्षण दिया है, जिसने न केवल निविदाओं में बिडिंग कैपेसिटी का झूठा शपथ पत्र लगाया, बल्कि अधूरे कार्य का फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र भी पेश किया। कायदे से जिस कंपनी पर आरटीपीपी (RTPP) नियमों के तहत भारी जुर्माना लगना था और उसे ब्लैकलिस्ट किया जाना था, उसे अधिकारियों ने मिलीभगत कर पिछले दरवाजे से सुरक्षित बाहर निकाल दिया।

अधूरे काम को बताया ‘पूरा’, करोड़ों का ‘स्काडा सिस्टम’ लगाया ही फिर भी उठा लिया भुगतान:-
पूरा मामला मैसर्स RRBC इन्फ्रा प्रोजेक्ट प्रा. लि., जोधपुर से जुड़ा है। कंपनी ने विभागीय इंजीनियर्स के साथ सांठगांठ कर उदयपुर संभाग की निविदा संख्या 09/2017-18 के अधूरे कार्य को अगस्त 2020 में ही कागजों में ‘पूर्ण’ घोषित करवा दिया और उसका डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड (DLP) भी शुरू करवा लिया। इतना ही नहीं, साल 2021 से कंपनी इस अधूरे कार्य का ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (O&M) का भुगतान भी लगातार उठा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि मार्च 2025 तक इस प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपए की लागत का ‘स्काडा (SCADA) सिस्टम’ शुरू ही नहीं हुआ था। जब इस फर्जीवाड़े की शिकायतें हुईं, तो अधिशाषी अभियंता (ग्रामीण खंड-उदयपुर) ने आनन-फानन में पूर्व में जारी सर्टिफिकेट को निरस्त कर 12 मार्च 2025 को ‘Revised Work Progress Certificate’ जारी किया, जिसमें काम को ‘रनिंग/अधूरा’ दर्शाया गया।
चेतावनी की उड़ाई धज्जियां, नई निविदाओं में फिर पेश किया झूठा शपथ पत्र:-
यह कंपनी आदतन इस प्रकार के कारनामों में लिप्त रही है। इससे पहले वर्ष 2021 में भी विभाग की निविदाओं में बिड कैपेसिटी छुपाकर झूठा शपथ पत्र देने पर विभाग की वित्त समिति (FC) ने फर्म को सख्त चेतावनी जारी करते हुए छोड़ा था कि भविष्य में ऐसा किया तो RTPP एक्ट की धारा 46 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। लेकिन विभाग के ढीले रवैये के कारण कंपनी ने इस चेतावनी पत्र की खुलेआम धज्जियां उड़ा दीं। कंपनी ने मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत अतिरिक्त मुख्य अभियंता (रीजन-बीकानेर) की निविदा संख्या 09/2025-26 और अतिरिक्त मुख्य अभियंता (रीजन-कोटा) की निविदा संख्या 10/2025-26 में उसी उदयपुर वाले अधूरे कार्य को छुपाकर फिर से बिडिंग कैपेसिटी का झूठा शपथ पत्र और कूट रचित दस्तावेज लगा दिए।
कार्रवाई से बचाने का अनोखा खेल: न EMD जप्त की, न किया डीबार:-

नियमों के मुताबिक, बीकानेर और कोटा की निविदाओं में जब कंपनी का यह गंभीर फर्जीवाड़ा पकड़ा गया, तो RTPP अधिनियम 2012 की धारा 11, 25 व 46 तथा आरटीपीपी नियम 2013 के नियम 80(2) व 82 के तहत सत्य निष्ठा संहिता (Code of Integrity) के उल्लंघन का मामला बनता था। इसके तहत फर्म की 2 प्रतिशत ईएमडी (EMD) राशि जप्त होनी चाहिए थी, फर्म को डीबार/ब्लैकलिस्ट किया जाना था और उसका रजिस्ट्रेशन निरस्त होना था। लेकिन यहीं पर पीएचईडी के ‘रक्षक ही भक्षक’ बन गए। बीकानेर में निविदा मूल्यांकन समिति (BEC) की बैठक में फर्म को अयोग्य तो माना गया, लेकिन उस पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने जानबूझकर ऐसा ताना-बाना बुना कि फर्म की बिड वैलेडिटी (Bid Validity) को आगे नहीं बढ़ाया गया और तकनीकी आधार पर फर्म को केवल निविदा से बाहर का रास्ता दिखाकर मामले को रफा-दफा कर दिया गया। इस शातिर खेल के जरिए ठेका कंपनी को EMD जप्ती और डीबार/ब्लैकलिस्ट होने की बड़ी कानूनी कार्रवाई से साफ बचा लिया गया। इस खेल से एक ओर जहां अधिकारी-इंजीनियर्स ने अपनी जेबें गरम कर ली, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार को करोड़ों रूपए की जप्ती राशि का नुकसान पहुंचाकर बड़े भ्रष्टाचार का खेल किया है।
PHED के 3 अतिरिक्त मुख्य अभियंताओं की पूरी मिलीभगत उजागर:-
इस पूरे खेल में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के 3 अतिरिक्त मुख्य अभियंताओं की मिलीभगत पूरी तरह से उजागर हो रही है। मामले को लेकर पीएचईडी प्रमुख शासन सचिव तक पहुंची शिकायत में इस पूरे प्रकरण की जलदाय विभाग की स्पेशल टीम से तकनीकी ऑडिट कराने के साथ ही मिलीभगत करने वाले तीनों अतिरिक्त अभियंताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। ठेका कंपनी के लंबे समय से चले आ रहे इस फर्जीवाड़े के प्रकरण में
-शैतान सिंह, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, रीजन-उदयपुर: जिन पर लिखित शिकायतों के बावजूद अधूरे काम को पूरा दिखाकर गलत भुगतान जारी रखने और फर्म को लगातार संरक्षण देने का आरोप है।

-राजेश पुरोहित, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, रीजन-बीकानेर: जिन्होंने BEC की बैठक में फर्जीवाड़ा साबित होने के बाद भी आज तक फर्म के खिलाफ RTPP नियमों के तहत कोई एक्शन नहीं लिया।
-दीपक कुमार झा, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, रीजन-कोटा: जिन्होंने फर्म को टेंडर से तो बाहर कर दिया, लेकिन दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई की फाइल को दबाए रखा।
अब सवाल उठता है कि पिछले 5 सालों से जलदाय विभाग फर्जीवाड़ों, भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी, ठेका कंपनियों के साथा टेंडरों की सौदेबाजी, करोड़ो के फर्जी भुगतान करने जैसे मामलों को लेकर प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में अपनी छवि खराब कर चुका है। क्या ऐसे में इतने गंभीर फर्जीवाड़े के मामले में जलदाय विभाग के नए प्रमुख शासन सचिव हेमन्त कुमार गेरा इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रकरण की विशेष जांच टीम से तकनीकी ऑडिट कराने, प्रकरण में लिप्त जलदाय विभाग के 3-3 अतिरिक्त मुख्य अभियंताओं से सहित अन्य इंजीनियर्स और ठेका कंपनी के फर्जीवाड़े के खेल में सख्त कार्रवाई कर पूरे विभाग में सरकार की ‘जीरो टोलरेंस’ की नीति का मैसेज देंगे। या फिर भ्रष्टाचार का यह मामला भी फाइलों में दम तोड़ देगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now