-18 ड्यूटियों की हाजिरी एक ही सीरियल नंबर से जारी कर फंस गए जैसलमेर डाइट के प्रधानाचार्य
-चहेते टीचर्स की कागजी ड्यूटी लगाकर लाखों के फर्जी भुगतान के कई आरोपों की चल रही है जांच
जयपुर/जैसलमेर। प्रदेश के शिक्षा विभाग में प्रशासनिक शिथिलता और वित्तीय घालमेल का एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), जैसलमेर में नियमों और स्थापित प्रक्रियाओं को पूरी तरह ताक पर रखकर एक ऐसा ‘कारनामा’ किया गया है, जिसने विभाग के उच्च अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए हैं। संस्थान के प्रधानाचार्य द्वारा साल 2021 से 2024 के बीच के शोध (Research) एवं अन्य विभागीय कार्यों के लिए नवंबर 2025 में एक ही दिन के भीतर लगातार सीरियल नंबर से उपस्थिति प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए।
एक ही तारीख, लगातार सीरियल नंबर: नियमों का सरेआम उल्लंघन:-
पूरा मामला अकादमिक शोध और अन्य आधिकारिक ड्यूटियों के सत्यापन से जुड़ा है। नियमों के मुताबिक, किसी भी कार्य या ड्यूटी के पूरे होने के तुरंत बाद उसका उपस्थिति प्रमाण पत्र (Attendance Certificate) जारी किया जाना अनिवार्य है। लेकिन जैसलमेर डाइट में वित्तीय और प्रशासनिक अनुशासन की धज्जियां उड़ाते हुए, पिछले तीन सालों की कुल 18 ड्यूटियों की उपस्थिति एक ही दिन में, एक के बाद एक लगातार सीरियल नंबर जारी करते हुए प्रमाणित कर दी गई। जानकारों का कहना है कि लगातार सीरियल नंबर से तीन साल का रिकॉर्ड एक साथ जारी होना सीधे तौर पर ‘बैक-डेटेड’ प्रविष्टियों और दस्तावेजों में हेरफेर की ओर इशारा करता है।

बिना पोस्टिंग के ही पुराने रिकॉर्ड पर ठोक दी मुहर:-
इस पूरे घालमेल का सबसे तकनीकी और गंभीर पहलू यह है कि जिस अवधि (वर्ष 2021) की उपस्थिति प्रमाणित की गई है, उस दौरान वर्तमान प्रधानाचार्य इस संस्थान में तैनात (Posted) ही नहीं थे। प्रशासनिक सिद्धांतों के अनुसार, कोई भी अधिकारी अपने कार्यकाल से पूर्व की अवधि के रिकॉर्ड को बिना किसी सक्षम जांच या विशेष आदेश के इस तरह सत्यापित नहीं कर सकता। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि वर्तमान प्रधानाचार्य ने अपने कार्यकाल से पहले की तारीखों और कार्यों पर किस अधिकार और किस दबाव में आकर विभागीय मुहर लगा दी?
कोटा और उदयपुर का काम, हाजिरी जैसलमेर से:-
अंधेरगर्दी यहीं खत्म नहीं होती। संबंधित कार्मिकों द्वारा जिन कार्यों को कोटा और उदयपुर संभाग में निष्पादित किया गया था, उनकी उपस्थिति भी संबंधित जिला संस्थानों के बजाय जैसलमेर डाइट से ही जारी कर दी गई। यह क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) का सीधा उल्लंघन है, जो इस पूरे प्रकरण को पूरी तरह संदिग्ध और मिलीभगत की ओर ले जाता है। Expose Now के इस खुलासे के बाद कई तीखे प्रशासनिक और वित्तीय सवाल खड़े हुए हैं:

-वेतन का रहस्य: यदि इन ड्यूटियों का उपस्थिति प्रमाण पत्र अब जाकर जारी हुआ है, तो क्या बीते तीन-चार सालों से इन कार्मिकों का वेतन अटका हुआ था? यदि वेतन का भुगतान पहले ही हो चुका है, तो बिना उपस्थिति प्रमाण पत्र के ट्रेजरी से बिल कैसे पास हुए?
-मिलीभगत की आशंका: इतनी लंबी अवधि के बाद अचानक एक ही दिन में 18 ड्यूटियों की हाजिरी को प्रमाणित करने के पीछे का वास्तविक वित्तीय हित या प्रशासनिक साठगांठ क्या है?
दोषी अधिकारियों पर गाज गिरना तय:-
Expose Now के इस खुलासे की भनक जैसे ही शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को लगी, महकमे में हड़कंप मच गया। विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, इस गंभीर गड़बड़ी को लेकर एक विशेष जांच कमेटी गठित कर दी गई है, जो डाइट जैसलमेर के डिस्पैच रजिस्टर, उपस्थिति पंजिका और प्रधानाचार्य के कार्यकाल के दस्तावेजों की बारीकी से जांच करेगी। दस्तावेजों की प्रारम्भिक जांच में प्रथम दृष्टया प्राचार्य की कार्यशैली को दोषपूर्ण और नियमों के विपरीत माना गया है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का दावा है कि जांच रिपोर्ट आते ही दोषी प्रधानाचार्य और संबंधित कार्मिकों के खिलाफ सिविल सेवा नियमों (CCA Rules) के तहत निलंबन और विभागीय चार्जशीट की बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
Expose Now ब्यूरो रिपोर्ट, जयपुर।