-FC में खुले राज, TC को टेंडर डाक्युमेंट्स की जांच के निर्देश
जयपुर। राजधानी जयपुर और आस-पास के लाखों लोगों की प्यास बुझाने वाली ‘बीसलपुर-जयपुर पेयजल परियोजना’ (Bisalpur Jaipur Water Supply Project) को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जनता के टैक्स के करोड़ों रुपयों को किस तरह ठिकाने लगाने की तैयारी चल रही थी, इसका खुलासा जल स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) की फायनेंस कमेटी (FC) की बैठक के आधिकारिक दस्तावेज़ों से हुआ है। करीब 83.12 करोड़ रुपये (EC Rs. 83.12 Cr) के इस भारी-भरकम टेंडर प्रस्ताव में ऐसी गंभीर वित्तीय विसंगतियां पाई गईं कि आला अधिकारियों को इस पर तुरंत ब्रेक लगाना पड़ा।
क्या है पूरा मामला? क्यों उठ रहे हैं सवाल?
दस्तावेज़ों के मुताबिक, बीसलपुर बांध के इनटेक पंपिंग स्टेशन से लेकर सुरजपुरा WTP और बालावाला तक के ट्रांसमिशन सिस्टम के संचालन, रखरखाव और मरम्मत (O&M) के लिए 7 साल का एक नया टेंडर जारी करने की तैयारी थी। मौजूदा ठेकेदार (M/s GCKC Projects & Works Pvt. Ltd.) का कार्यकाल 23 अप्रैल 2026 को खत्म हो चुका है। ऐसे में नया टेंडर लाना जरूरी था, लेकिन इस नए प्रस्ताव के पीछे की ‘इंजीनियरिंग’ पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
Expose: टेंडर में खेल की आशंका, चीफ इंजीनियर ने पकड़ी चोरी:-
जब इस 83.12 करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी के लिए रखा गया, तब चीफ इंजीनियर (Tech.) ने इस प्रस्ताव की धज्जियां उड़ाते हुए कई गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं, जो विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती हैं:
-अनुमानित लागत को जानबूझकर बढ़ाया गया (Over-pricing): चीफ इंजीनियर ने साफ शब्दों में कहा कि इस काम के लिए जो अनुमानित लागत (Estimated Cost) तय की गई है, वह बहुत ज्यादा (On higher side) दिखाई दे रही है।
-डबल मुनाफे का खेल: रिपोर्ट के अनुसार, जो BSR (Basic Schedule of Rates) दरें होती हैं, उनमें पहले से ही स्टैंडर्ड ओवरहेड्स और मुनाफा शामिल होता है। इसके बावजूद, इस टेंडर प्रस्ताव में GST और ठेकेदार के मुनाफे (Contractor Profit) को अलग से ऊपर से जोड़ दिया गया! यानी सीधे तौर पर बजट को बढ़ाने की कोशिश की गई।
-पंप की क्षमता पर भी संदेह: प्रस्ताव में पंपों की कार्यक्षमता (Pump Efficiencies) को लेकर जो दावे किए गए, उन पर भी सवाल उठाए गए हैं और उन्हें दोबारा जांचने (Re-examine) को कहा गया है।
नहीं थी कोई ठोस रणनीति (KPI नदारद):-
करोड़ों का ठेका प्राइवेट हाथों में देने की तैयारी तो थी, लेकिन काम की क्वालिटी कैसे चेक होगी, इसका कोई अता-पता नहीं था। बैठक में यह बात सामने आई कि इस प्रस्ताव में की-परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स (KPIs) यानी काम के मानक साफ तौर पर परिभाषित ही नहीं थे। बिना किसी पारदर्शी और जवाबदेह फ्रेमवर्क के ही यह टेंडर पास कराने की जल्दबाजी की जा रही थी।
प्रस्ताव को किया गया ‘डिफर’ (Defer):-
इस संभावित वित्तीय गड़बड़ी और अधूरी तैयारियों को देखते हुए फायनेंस कमेटी(FC) ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी देने से साफ इनकार कर दिया। FC ने “इस प्रस्ताव को फिलहाल टाल (Defer) दिया गया है। अब इसे पहले तकनीकी समिति (Technical Committee) के सामने चर्चा के लिए भेजा जाएगा। जब तक तकनीकी समिति इसकी बारीकी से जांच कर अपनी सिफारिश नहीं देती, तब तक इस टेंडर को मंजूरी नहीं मिलेगी।”
बड़ा सवाल:- जब विभाग को पता था कि पुराने ठेकेदार का समय अप्रैल 2026 में खत्म हो रहा है, तो ऐन वक्त पर ऐसा त्रुटिपूर्ण और जरूरत से ज्यादा महंगी लागत वाला प्रस्ताव क्यों तैयार किया गया? क्या इसके पीछे किसी ठेका कंपनी को फायदा पहुंचाने की मंशा थी? जनता के पैसे के इस ‘ओवर-बजटिंग’ के खेल का असली मास्टरमाइंड कौन है? जिसने बीसलपुर-जयपुर पेयजल सप्लाई प्रोजेक्ट के ऑपरेशन एण्ड मेंटीनेंस कार्य कार्य के टेंडर लगने से पहले ही उसे कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्या पीएचईडी प्रमुख शासन सचिव इस टेंडर को लगाने में देरी और टेंडर में करोड़ों रूपए के घोटाले की साजिश रचने वाले इंजीनियर/अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे या फिर यह मामला भी फाइलों में गुम हो जाएगा।
Expose Now ब्यूरो रिपोर्ट, जयपुर।