-टेंडर प्रीमियम का खेल द-एंड: इंजीनियरों-ठेकेदारों के सिंडिकेट को तगड़ा झटका, 4 नए अनधिकृत खर्चे पूरी तरह ब्लैकलिस्ट
-अस्वीकृत खर्चों की लिस्ट बढ़कर हुई 10, नियमों की धज्जी उड़ाने पर JJM बजट से नहीं मिलेगा एक भी रुपया
जयपुर। राजस्थान में जल जीवन मिशन (JJM) के नाम पर चल रहे करोड़ों के खेल और बंदरबांट को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा प्रहार किया है। राज्य के रसूखदार ‘टेंडर माफिया’ के सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए दिल्ली से वित्तीय अनुशासन का ऐसा चाबुक चला है, जिसने महकमे से लेकर ठेकेदारों के गलियारों तक हड़कंप मचा दिया है।
खजाने की लूट पर फुल स्टॉप: 67,000 करोड़ के प्रस्ताव फ्रीज:-
मलाईदार टेंडरों के जरिए जनता की गाढ़ी कमाई को ठिकाने लगाने की साजिश पर केंद्र ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। ओवरसाइज्ड डीपीआर (Detailed Project Report) के जरिए तैयार किए गए 67 हजार करोड़ रुपये के भारी-भरकम महा-प्रस्तावों को केंद्र सरकार ने होल्ड पर डाल दिया है। इस कड़े एक्शन ने साफ कर दिया है कि अब कागजी आंकड़ों का खेल खेलकर तिजोरियां भरने की इजाजत किसी को नहीं मिलेगी।
‘टेंडर प्रीमियम’ के खेल पर रोक, 10 आइटम ब्लैकलिस्ट:-
मिशन में चल रही भारी आर्थिक गड़बड़ियों और अफसरों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने ‘अस्वीकृत खर्चों’ (Non-permissible expenses) का दायरा बढ़ा दिया है। इस लिस्ट को बढ़ाकर अब सीधे 10 आइटम कर दिया गया है। इंजीनियरों और ठेकेदारों के सबसे चहेते ‘टेंडर प्रीमियम’ समेत चार नए अनधिकृत खर्चों को पूरी तरह प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया गया है। इसके तहत अब कोई भी अधिकारी मिलीभगत करके टेंडर की कीमतों को बढ़ा-चढ़ाकर पास नहीं कर पाएगा।
फंडिंग ब्लॉक: JJM तिजोरी से नहीं, जेब से भुगतेंगे!
केंद्र सरकार ने राजस्थान सरकार और संबंधित विभाग को दो टूक चेतावनी दे दी है कि ब्लैकलिस्ट किए गए इन नए खर्चों का भुगतान किसी भी हाल में मिशन के केंद्रीय या सरकारी बजट से नहीं होगा।अगर किसी अधिकारी ने मनमानी की, तो उसकी भरपाई सीधे उसकी जेब से या राज्य को अपने स्तर पर करनी होगी। इस ‘फंडिंग ब्लॉक’ के फैसले ने टेंडर माफिया का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया है।
ग्राउंड जीरो पर गेम चेंजर साबित होगा यह एक्शन:-
राजस्थान में पूर्व में हुए जल जीवन मिशन घोटालों के दाग को धोने और हर घर जल के संकल्प को ईमानदारी से जमीन पर उतारने के लिए केंद्र का यह कदम ‘गेम चेंजर’ साबित होने वाला है। जहाँ पहले ओवरसाइज्ड डीपीआर और टेंडर प्रीमियम के नाम पर ठेकेदारों को मलाई बांटी जाती थी, वहीं अब फंडिंग ब्लॉक होने से इस पूरे सिंडिकेट की कमर टूट गई है। जनता के हक के पैसे को टेंडर माफियाओं की जेब में जाने से रोकने के लिए लगाया गया यह ‘फुल स्टॉप’ आने वाले दिनों में कई बड़े चेहरों को बेनकाब कर सकता है।
Expose Now ब्यूरो रिपोर्ट, जयपुर