दुर्गापुर स्टील प्लांट मामला: केवल सफल उम्मीदवारों की सूची जारी करना पर्याप्त, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किए भर्ती नियम

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश में भर्ती प्रक्रियाओं और परिणामों की घोषणा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल तय की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भर्ती के विज्ञापन या संबंधित नियमों में सभी उम्मीदवारों के अंक सार्वजनिक करने का कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं है, तो केवल अंक प्रकाशित न होने के आधार पर किसी भी उम्मीदवार को ‘सफल’ नहीं माना जा सकता। जस्टिस पामिदिघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि भर्ती संस्था के खिलाफ ऐसी स्थिति में कोई ‘प्रतिकूल अनुमान’ लगाना कानूनन गलत होगा।

कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय ‘दुर्गापुर स्टील प्लांट’ (Durgapur Steel Plant) द्वारा दायर एक अपील पर सुनाया। मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूर्व में प्रतिवादियों को ‘प्लांट अटेंडेंट’ पद पर नियुक्ति के लिए विचार करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को कानून के प्रतिकूल मानते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने पाया कि चयन प्रक्रिया एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा आयोजित की गई थी और नियमों के अनुसार केवल सफल उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित की गई थी।

अंक प्रकाशित न होना विफलता का प्रमाण नहीं

जस्टिस आलोक अराधे द्वारा लिखे गए फैसले में कहा गया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि याचिकाकर्ता लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण हुए थे। कुछ उम्मीदवारों का यह तर्क था कि उनके अंक सार्वजनिक नहीं किए गए, इसलिए उन्हें गलत तरीके से बाहर किया गया। इस पर अदालत ने कहा कि जब भर्ती विज्ञापन में ही अंक प्रकाशित करने की कोई अनिवार्यता नहीं थी, तो संस्था को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

रिकॉर्ड की उपलब्धता और स्पष्टीकरण

सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि काफी समय बीत जाने के कारण चयन प्रक्रिया से जुड़े पुराने रिकॉर्ड नष्ट हो चुके थे। भर्ती संस्था (अपीलकर्ता) ने इस संबंध में स्पष्टीकरण दिया कि नीति के तहत पुराने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस स्पष्टीकरण को विश्वसनीय माना और कहा कि केवल रिकॉर्ड प्रस्तुत न कर पाने के कारण यह नहीं मान लिया जाना चाहिए कि अनुत्तीर्ण उम्मीदवार वास्तव में सफल रहे थे।

भर्ती संस्थाओं के लिए राहत

यह निर्णय आने वाले समय में विभिन्न सरकारी और निजी भर्ती संस्थाओं के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है। अक्सर चयन प्रक्रिया के बाद असफल उम्मीदवार पारदर्शिता की आड़ में अदालतों का रुख करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि न्यायिक हस्तक्षेप तभी संभव है जब स्थापित नियमों या विज्ञापन की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन हुआ हो। केवल धारणाओं या अनुमानों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया को चुनौती नहीं दी जा सकती।

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