-पूर्व मंत्री महेश जोशी, पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल, सीई दिनेश गोयल सहित 12 लोग हो चुके हैं गिरफ्तार
-संजय अग्रवाल और संजय बड़ाया, भ्रष्टाचार के दोनों असली ‘खलनायक’ अभी भी ACB की पकड़ से दूर
जयपुर। राजस्थान के इतिहास का सबसे बड़ा ‘कॉरपोरेट डकैती’ कांड अब बेनकाब हो चुका है। जल जीवन मिशन (JJM) के नाम पर जनता की प्यास बुझाने का पैसा, इन 16 सफेदपोश ठेका कंपनियों ने भ्रष्टाचार की ‘पाइपलाइन’ से सीधे अपनी तिजोरियां भरने की योजना बनाई थी। Expose Now आज उन कंपनियों के चेहरों से नकाब उतार रहा है, जिन्होंने टेंडरों की ‘पूलिंग’ कर राजस्थान सरकार को 5000 करोड़ का चूना लगाने की साजिश रची थी। संस्थागत भ्रष्टाचार के इस खेल की वजह से राजस्थान की 60 फीसदी ग्रामीण जनता आज भी जल जीवन मिशन योजना से वंचित है। अगर राजस्थान में जल जीवन मिशन योजना के टेंडरों में सौदेबाजी व भ्रष्टाचार का खेल नहीं चलता तो आज देशभर में इस योजना का सबसे ज्यादा फायदा प्रदेश की जनता को मिलता और यह योजना यहां भागीरथी योजना बनकर सफल होती, लेकिन नेताओं, अधिकारियों, इंजीनियर्स, दलालों और ठेका कंपनियों की मिलीभगत और कमीशनखोरी के खेल ने प्रदेश की 60 फीसदी जनता के साथ धोखेबाजी करके इस योजना को शुरू होने से पहले की फेल कर दिया।

लूट का ‘पूलिंग’ मॉडल, कंपनियों ने खुद तय की भ्रष्टाचार की दरें:-
ये महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘आर्थिक हमला’ था। इन 16 कंपनियों ने आपस में गठजोड़ कर प्रतिस्पर्धा को खत्म कर दिया। L&T, Megha Engineering, SPML और DARA जैसी दिग्गज कंपनियों ने छोटे-मझोले ठेकेदारों के साथ मिलकर एक ऐसा ‘कार्टेल’ बनाया कि टेंडर किसी भी हाल में इसी सिंडिकेट के पास रहे।
इन 16 कंपनियों के नाम राजस्थान के जल-घोटाले के इतिहास में काले अक्षरों में लिखे जाएंगे:
Larsen and Toubro (L&T)
Megha Engineering (MEIL)
Vishnu Prakash R Punglia Ltd.
SPML Pvt. Ltd.
OM Infra Ltd.
DARA Engineering
GA Infra
GCKC Projects
JWIL Infra
NCC Pvt. Ltd.
JMC Projects
Lahoty Buildcon
GVPR Engineering
Jagadish Prasad Agrawal (JPA)
Offshore Infrastructures
Goodwill Advance Construction
-ब्लैकलिस्टिंग में देरी क्यों? आखिर क्या मजबूरी है कि इन दागदार कंपनियों को अभी तक विभाग से लात मारकर बाहर नहीं किया गया?
संजय अग्रवाल और संजय बड़ाया: भ्रष्टाचार के दो ‘खलनायक’:-

कंपनियों की इस लूट को सरकारी फाइल पर कानूनी जामा पहनाया जलदाय विभाग के इंजीनियर संजय अग्रवाल ने। करोड़ों के निजी मुनाफे के लिए राज्य के 5000 करोड़ की बलि दे दी गई। वहीं, दलाल संजय बड़ाया ने इस सिंडिकेट और मंत्रालय के बीच ‘डील’ को अंजाम दिया। सवाल यह है कि क्या ACB इन कंपनियों के निदेशकों के कॉलर तक पहुँचने का साहस दिखाएगी?
क्या सिर्फ ‘जोशी’ और ‘अग्रवाल’ तक थमेगी जांच?
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की फाइलों में अब सवाल गहरा रहा है कि क्या तत्कालीन जलदाय मंत्री महेश जोशी और पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल महज इस फिल्म के चेहरे थे? सूत्र बताते हैं कि जांच का अगला पड़ाव तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के वो रसूखदार गलियारे हो सकते हैं, जहाँ से इन फाइलों को ‘क्लियरेंस’ की हरी झंडी मिलती थी। बिना उच्च संरक्षण के 5000 करोड़ का खेल मुमकिन नहीं था।
खुलासा: यह घोटाला सिर्फ पाइप और नल का नहीं है, यह राजस्थान के भरोसे का कत्ल है। ‘Expose Now’ इन कंपनियों और उनके दलाल इंजीनियरों के खिलाफ तब तक मोर्चा खोले रखेगा जब तक जेजेएम के इन ‘मगरमच्छों’ को जेल की सलाखें नसीब नहीं हो जातीं।