सुलगेगा या सुलझेगा पांचना बांध विवाद? चंबल के पानी से समाधान की उम्मीद, 15 दिन का अल्टीमेटम

करौली। करौली जिले की जीवनदायिनी कही जाने वाली गंभीर नदी के सूखने और क्षेत्र में गहराते जल संकट को लेकर पांचना बांध विवाद एक बार फिर सुलग उठा है। बांध से नदी में पानी छोड़ने की मांग को लेकर गुरुवार को हिण्डौन के देवलेन मोड़ पर ‘गंभीर नदी बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले सर्वसमाज की एक विशाल महापंचायत का आयोजन हुआ। इस महापंचायत में 360 गांवों के प्रमुख पंच-पटेलों, किसान नेताओं और हजारों ग्रामीणों ने हुंकार भरी।

बढ़ते जन-आक्रोश और बांध की ओर कूच करने की किसानों की चेतावनी के बीच जिला प्रभारी एवं गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम तथा करौली विधायक दर्शन सिंह गुर्जर देर शाम महापंचायत स्थल पहुंचे। उन्होंने किसानों का ज्ञापन लिया और आश्वासन दिया कि भजनलाल सरकार किसानों की समस्या को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है और किसी भी किसान के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

प्रशासन के छूटे पसीने, ‘कूच’ की चेतावनी के बाद पहुंचे मंत्री

महापंचायत के दौरान किसान नेताओं ने प्रशासन को ज्ञापन लेने के लिए आधे घंटे का अल्टीमेटम दिया था। चेतावनी दी गई थी कि यदि कोई सक्षम अधिकारी या जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचा, तो हजारों लोग पांचना बांध की तरफ कूच कर देंगे। माहौल गरमाता देख पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल के निर्देशन में हिंडौन, टोडाभीम और करौली पुलिस के साथ आरएसी की दो कंपनियां और करीब 250 जवान तैनात किए गए। अल्टीमेटम खत्म होने के बाद जब लोग आगे बढ़ने लगे, तभी गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम के पहुंचने की सूचना से स्थिति शांत हुई।

किसानों ने रखीं ये प्रमुख मांगें (15 दिन का अल्टीमेटम)

मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में संघर्ष समिति ने सरकार के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:

  1. गंभीर नदी को ‘पुनर्जीवन योजना’ में शामिल किया जाए।
  2. पांचना बांध जल वितरण समिति में गंभीर नदी जल समिति को उचित प्रतिनिधित्व मिले।
  3. नदी में नियमित जल प्रवाह सुनिश्चित किया जाए।
  4. करौली से भरतपुर तक के गंभीर नदी क्षेत्र को ‘कमांड एरिया’ घोषित किया जाए।
  5. पहले चंबल का पानी पांचना बांध में लाया जाए, ताकि सभी पक्षों को पर्याप्त पानी मिल सके।

संघर्ष समिति के पदाधिकारी सुमरन पीलबाड़ ने स्पष्ट किया कि सरकार को इन मांगों के समाधान के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। यदि तय समय में सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो एक बड़ा उग्र जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा।

“किसानों को जातियों में बांटकर रोटियां सेकना गलत” – मंत्री बेढम

महापंचायत को संबोधित करते हुए मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा, “चाहे पांचना बांध के 39 गांव हों, कमांड एरिया का इलाका हो या फिर 360 गांवों के पानी की समस्या—सरकार हर किसान के साथ है। आप 5-7 लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल बना लें, मैं खुद आपकी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाऊंगा।”

उन्होंने भरतपुर में संभागीय आयुक्त के नेतृत्व में चल रही अधिकारियों की बैठक का हवाला भी दिया। साथ ही, स्थानीय विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि गंगापुर के खडीप में चल रहे धरने को राजनीतिक रूप दिया जा रहा है और किसानों को जातियों में बांटने की कोशिश की जा रही है, जो कि बेहद निंदनीय है।

समझिए क्या है पांचना बांध विवाद की असली जड़?

1. साल 1972 की त्रासदी और निर्माण: वर्ष 1972 में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भरतपुर और करौली के इलाकों को बचाने के लिए पांचना नदी पर इस बांध का निर्माण शुरू हुआ था।

2. अन-कमांड (डाउनस्ट्रीम) पक्ष का तर्क: पांचना बांध संघर्ष समिति के अध्यक्ष अशोक सिंह धाबाई और हाकिम सिंह बैंसला का कहना है कि बांध के डूब क्षेत्र में उन 39 गांवों के किसानों की उपजाऊ जमीनें गईं, जिनकी बदौलत बांध बना। इसलिए पानी पर पहला हक उनका है। वे रोस्टर बनाकर बांध पर पानी की पहरेदारी कर रहे हैं ताकि गेट न खोले जा सकें।

3. कमांड एरिया पक्ष का तर्क: दूसरी तरफ, कमांड एरिया (नहर क्षेत्र) के करीब 35 गांवों के किसान पिछले 14 दिनों से महापंचायत और धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि नहर निर्माण के लिए उनकी जमीनें ली गईं, लेकिन वर्षों से नहरें सूखी हैं। वे हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर नहरों में पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं।

सियासी पारा गर्म: पायलट की ‘कानून सम्मत’ सलाह, रामकेश मीणा का इस्तीफे का दांव

इस संवेदनशील मुद्दे पर राजस्थान की सियासत भी पूरी तरह गरमाई हुई है:

  • सचिन पायलट (कांग्रेस महासचिव): उन्होंने सरकार से न्यायपूर्ण निर्णय की अपील करते हुए कहा कि पानी सबकी जरूरत है। न्यायपालिका पर सबको भरोसा है, इसलिए हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान और पालना होनी चाहिए। सरकार को मौके पर टीम भेजकर दोनों पक्षों को विश्वास में लेकर बीच का रास्ता निकालना चाहिए, इसे जातीय रंग देने से बचना होगा।
  • डॉ. किरोड़ी लाल मीणा (कृषि मंत्री): उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार कमांड एरिया में पानी छोड़ने की पुरजोर वकालत की है।
  • रामकेश मीणा (विधायक, गंगापुरसिटी): उन्होंने भाजपा सरकार पर दो जातियों को आपस में लड़वाने का आरोप लगाया। उन्होंने यहाँ तक कह दिया, “अगर मुख्यमंत्री कहें कि मेरे इस्तीफे से पांचना का पानी छोड़ दिया जाएगा, तो मैं एक मिनट में विधायकी छोड़ दूंगा।” उन्होंने कोटा दौरे पर आए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

फिर होगी अहम बैठक

मामले को सुलझाने के लिए संभागीय आयुक्त कार्यालय में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई थी, जिसमें आईजी सहित करौली और सवाई माधोपुर के कलेक्टर पहुंचे। हालांकि, गुर्जर पक्ष (अन-कमांड क्षेत्र) के प्रतिनिधिमंडल के न पहुंचने के कारण बैठक को स्थगित करना पड़ा। अब यह महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को दोबारा होगी, जिस पर पूरे राजस्थान की नजरें टिकी हैं।


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