अलवर: राजस्थान हाईकोर्ट ने अलवर की सिलीसेढ़ झील स्थित ‘देसी ठाठ’ होटल की सील खोलने के मामले में जयपुर कंज्यूमर कोर्ट की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एडवोकेट जनरल (AG) को तलब कर तीखे सवाल पूछे। कोर्ट ने आश्चर्य जताया कि जो मामला क्षेत्राधिकार में ही नहीं था, उसमें कंज्यूमर कोर्ट ने न केवल आदेश दिए, बल्कि कोर्ट के अध्यक्ष स्वयं सील खुलवाने मौके पर पहुंच गए।
क्या है पूरा विवाद?
अलवर की सिलीसेढ़ झील के बहाव क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए यूआईटी (UIT) ने दिसंबर 2025 में ‘देसी ठाठ’ सहित 13 होटलों को सील किया था। होटल संचालक नमन खंडेलवाल ने पहले एडीजे कोर्ट और फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए सील बरकरार रखने के आदेश दिए थे।

कंज्यूमर कोर्ट की विवादास्पद भूमिका
हैरानी की बात तब हुई जब हाईकोर्ट और निचली अदालतों से राहत न मिलने पर मामला जयपुर कंज्यूमर कोर्ट पहुँचा। 6 जनवरी 2026 को कंज्यूमर कोर्ट ने न केवल सील हटाने के आदेश जारी किए, बल्कि अध्यक्ष जी.एल. मीना खुद अलवर पहुँचकर सील खुलवाने खड़े हो गए। कानूनविदों के अनुसार, अलवर का मामला जयपुर कंज्यूमर कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता ही नहीं है।
हाईकोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
सुनवाई के दौरान अलवर UIT के वकील अजय शुक्ला ने कोर्ट को पूरी स्थिति से अवगत कराया। इस पर कोर्ट ने AG से पूछा:
“यह सब क्या हो रहा है? कंज्यूमर कोर्ट का इस मामले में ऐसा क्या ‘पर्सनल इंटरेस्ट’ था? क्यों न कंज्यूमर कोर्ट के अध्यक्ष को ही इस मामले में पक्षकार (Party) बना लिया जाए?”
