प्रदेश के युवाओं को उद्यमी बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना’ वर्तमान में केवल कागजों और सरकारी फाइलों तक ही सीमित नजर आ रही है। स्वरोजगार की उम्मीद में आवेदन करने वाले 90 हजार से अधिक युवाओं के साथ यह एक मजाक बनकर रह गया है, क्योंकि अब तक केवल 60 युवाओं को ही वास्तव में लोन मिल पाया है।
आंकड़ों की जुबानी, योजना की विफलता
इसी साल 12 जनवरी को शुरू हुई इस योजना के तहत युवाओं को 10 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण (Interest-Free Loan) देने का लक्ष्य रखा गया था। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर से 90 हजार से ज्यादा युवाओं ने आवेदन किया और कुल 4427 करोड़ रुपये के लोन की मांग की। उद्योग विभाग ने तत्परता दिखाते हुए 2074 करोड़ रुपये से जुड़े 42,500 आवेदन मंजूर कर बैंकों को भेज दिए, लेकिन बैंकों के स्तर पर यह प्रक्रिया बेहद धीमी रही।
15 जिलों में एक भी लोन मंजूर नहीं
हैरानी की बात यह है कि प्रदेश के 15 जिले ऐसे हैं जहां बैंकों ने एक भी आवेदन स्वीकार नहीं किया है। इन जिलों में कोटा, जालौर, चित्तौड़गढ़, सिरोही, बूंदी, भिवाड़ी, हनुमानगढ़, डीग, नागौर, सलूम्बर, ब्यावर, धौलपुर, डीडवाना-कुचामन, जोधपुर और बालोतरा शामिल हैं। जहां जयपुर ग्रामीण से सबसे अधिक 4349 आवेदन प्राप्त हुए, वहीं भिवाड़ी जैसे क्षेत्रों में यह संख्या सबसे कम (44) रही।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
इस पूरे मामले पर उद्योग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बैंकों के साथ तालमेल बिठाने का प्रयास किया जा रहा है। उद्योग विभाग के आयुक्त के अनुसार, जिला कलेक्टरों को पत्र भेजकर बैंकर्स कमेटी की बैठक करने के लिए कहा गया है। साथ ही राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी के साथ मीटिंग कर लंबित आवेदनों पर जल्द से जल्द ऋण राशि जारी करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
योजना का लक्ष्य पहले वर्ष में 30 हजार युवाओं को लाभान्वित करना था, लेकिन आवेदनों की भारी संख्या के मुकाबले बैंकों की सुस्ती ने हजारों युवाओं के स्टार्टअप और व्यापार शुरू करने के सपने को अधर में लटका दिया है।
