राजस्थान हाईकोर्ट: आपराधिक अपील लंबित होने के आधार पर पेंशन रोकना गलत, 6% ब्याज के साथ बकाया भुगतान के आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने कर्मचारी हितों में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी को आपराधिक मामले में निचली अदालत से दोषमुक्त (बरी) कर दिया गया है, तो केवल उसके खिलाफ अपील लंबित होने के आधार पर उसके पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति परिलाभों को नहीं रोका जा सकता है।

क्या है पूरा मामला?

यह आदेश न्यायमूर्ति रवि चिरानिया ने देवेंद्र सलोलिया की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता अनुसूचित जाति, जनजाति वित्त एवं विकास निगम में कार्यरत थे। सेवा के दौरान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) में मामला दर्ज होने के कारण उन्हें एसीपी (ACP) का लाभ नहीं दिया गया था। हालांकि, अप्रैल 2016 में एसीबी कोर्ट, कोटा ने उन्हें इस मामले में दोषमुक्त कर दिया था।

सेवानिवृत्ति के बाद रोका गया लाभ

निचली अदालत के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की, जो वर्तमान में लंबित है। इसी बीच याचिकाकर्ता 31 जनवरी 2022 को सेवानिवृत्त हो गए। विभाग ने हाईकोर्ट में अपील लंबित होने का हवाला देते हुए उनके पेंशन परिलाभों को रोक दिया, जिसे याचिकाकर्ता ने कोर्ट में चुनौती दी।

अदालत का फैसला और ब्याज के निर्देश

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता लक्ष्मीकांत शर्मा ने तर्क दिया कि दोषमुक्ति के बाद अपील लंबित रहना पेंशन रोकने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए विभाग को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को तीन महीने के भीतर उनके समस्त बकाया परिलाभों का भुगतान किया जाए। साथ ही, कोर्ट ने देरी के लिए बकाया राशि पर छह फीसदी (6%) वार्षिक ब्याज देने के भी निर्देश दिए हैं।

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