-साम, दाम, दंड, भेद… सब हुए बेकार, ‘ईमानदारी’ के आगे टूटा भ्रष्टाचारियों का गुरूर
-अब होगा असली ‘ट्रीटमेंट’, घोटालों की फाइलें री-ओपन, कई बड़े चेहरे रडार पर
जयपुर
जयपुर डिस्कॉम में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाना सीएमडी आरती डोगरा के लिए ‘अपनों’ और ‘बाहरियों’ के चक्रव्यूह का कारण बन गया है। लेकिन, ताज़ा घटनाक्रमों ने यह साफ कर दिया है कि करोड़ों के घोटालों में लिप्त सिंडिकेट की हर चाल अब उन पर ही भारी पड़ने वाली है। विभाग के कुछ दागी इंजीनियर्स और ब्लैकलिस्टेड फर्मों द्वारा सीएमडी आरती डोगरा को घेरने के तमाम प्रयास विफल साबित हुए हैं।
दरअसल जयपुर डिस्कॉम में इन दिनों ‘कुर्सी’ की लड़ाई नहीं, बल्कि ‘ईमानदारी बनाम भ्रष्टाचार’ का महासंग्राम छिड़ा हुआ है। करोड़ों के घोटालों में लिप्त सिंडिकेट ने सीएमडी आरती डोगरा को घेरने की जो साजिश रची थी, वह अब ताश के पत्तों की तरह ढहती नजर आ रही है। हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत के बाद अब सीएमडी ‘डबल पावर’ के साथ विभाग के सफेदपोश भ्रष्टाचारियों और ब्लैकलिस्टेड फर्मों का हिसाब करने के लिए तैयार हैं।
XEN आर.के. मीणा का स्टे वैकेट कराने की तैयारी:-
पूरे प्रकरण की जड़ में एक्सईएन (XEN) आर.के. मीणा का मामला है। भरतपुर के वैर में तैनाती के दौरान स्थानीय विधायक और जनता की शिकायतों के बाद मीणा को ‘एसई प्लान’ जयपुर लगाया गया था। यहाँ विधानसभा सैल के कार्यों में लापरवाही और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों के चलते 12 जनवरी 2026 को उन्हें एपीओ (APO) कर दिया गया और बाद में धौलपुर तबादला किया गया। हालांकि, मीणा कोर्ट से इस पर ‘स्टे’ ले आए, लेकिन अब डिस्कॉम प्रशासन इस स्टे को हटवाने (Vacate) के लिए पूरी ताकत के साथ कानूनी पैरवी की तैयारी कर रहा है। सूत्रों की मानें तो डिस्कॉम के पास मीणा के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, जिससे उनकी कुर्सी पर फिर से खतरा मंडरा रहा है।
षड्यंत्र का पर्दाफाश: 237 करोड़ के घोटाले वाली फर्में और पूर्व एमडी सक्रिय:-
‘Expose Now’ की पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस पूरे खेल के पीछे जयपुर डिस्कॉम के एक पूर्व एमडी और उनकी एक चहेती फर्म का हाथ बताया जा रहा है। गौरतलब है कि यह फर्म विभाग में 237 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले में पहले ही ब्लैकलिस्ट (Debar) की जा चुकी है। जब से आरती डोगरा ने कमान संभाली है, विभाग में वर्षों से चल रहे फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार पर नकेल कसी गई है। दो अलग-अलग प्रकरणों में करोड़ों के घोटालों पर FIR दर्ज होने से यह ‘भ्रष्ट सिंडिकेट’ बौखलाया हुआ है।
हाईकोर्ट खंडपीठ से मिली राहत, बैकफुट पर साजिशकर्ता:-
हाल ही में डीपीसी (DPC) मामले को हथियार बनाकर सीएमडी आरती डोगरा के खिलाफ एसीबी जांच के जो निर्देश एकल पीठ से दिलवाए गए थे, उन पर अगले ही दिन हाईकोर्ट की खंडपीठ ने रोक लगा दी। इसे विभाग के उन ईमानदार अफसरों की जीत माना जा रहा है जो भ्रष्ट ठेकेदारों के खिलाफ डटे हुए हैं। प्रभावशाली ठेकेदारों ने ‘साम, दाम, दंड, भेद’ की रणनीति अपनाकर सीएमडी के तबादले की भी पुरजोर कोशिश की, लेकिन सरकार के जीरो टॉलरेंस विजन के आगे उनकी एक न चली।
भ्रष्टाचार के खिलाफ अब और तेज होगी कार्रवाई:-
तबादले और दबाव की राजनीति में फेल होने के बाद अब गेंद सीएमडी आरती डोगरा के पाले में है। सूत्रों की मानें तो आने वाले हफ्ते में डिस्कॉम में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी हो सकती है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी इस जंग में अब उन रिटायर्ड अधिकारियों और वर्तमान इंजीनियर्स की लिस्ट तैयार है, जिन्होंने ब्लैकलिस्टेड फर्मों के साथ मिलकर विभाग के खजाने में सेंध लगाई थी। इस हमले के बाद सीएमडी आरती डोगरा अब और ‘डबल पावर’ के साथ विभाग की सफाई में जुटेंगी। आने वाले दिनों में कई बड़े ठेकेदारों और उनके मददगार इंजीनियर्स पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
“सिंडिकेट की साजिशें नाकाम, सीएमडी की राह साफ! अब देखना यह है कि आर.के. मीणा के स्टे के बाद डिस्कॉम की कानूनी स्ट्राइक कितनी घातक होती है। लेकिन एक बात तय है—भ्रष्टाचार के ‘शतरंज’ के मोहरे अब मात खाने को तैयार हैं। डिस्कॉम की हर बड़ी अपडेट और अंदरूनी खबर के लिए जुड़े रहिए ‘Expose Now’ के साथ।”
