EXPOSE NOW स्पेशल रिपोर्ट: JJM में 4503 करोड़ का बजट, पर राजस्थान को मिलेगा सिर्फ 500 करोड़ का ‘लॉलीपॉप’?

-पिछले 2 साल से ठेकेदारों का 4000 करोड़ से ज्यादा का भुगतान बकाया
-एनजेजेएम के न्यू-पैटर्न से राजस्थान को उठाना पड़ेगा मोटा नुकसान

जयपुर। केन्द्र सरकार द्वारा जल जीवन मिशन (JJM) के तहत राजस्थान को 4503 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। लेकिन जमीनी हकीकत और नेशनल जल जीवन मिशन (NJJM) की शर्तों के कारण, राजस्थान को मुश्किल से 500 से 600 करोड़ रुपये ही मिलने की उम्मीद है। इस रिपोर्ट में हम समझेंगे कि आखिर क्यों 4000 करोड़ रुपये के बजट का यह बड़ा अंतर आ रहा है और राज्य सरकार पर इसका क्या असर पड़ेगा।

  1. एनजेजेएम (NJJM) की कड़ी शर्तें और हिसाब-किताब:-

नेशनल जल जीवन मिशन (NJJM) ने राजस्थान से चल रही योजनाओं का पूरा हिसाब-किताब मांगा है। बजट जारी करने से पहले यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी:

-सिंगल विलेज योजनाएं: सबसे पहले सिंगल विलेज स्कीमों का हिसाब मांगा गया है, जिसमें प्रत्येक योजना के वित्तीय प्रावधान, बजट आवंटन और खर्च की गई राशि का ‘फाइनेंशियल रिकंसीलेशन’ (Financial Reconciliation) कर रिपोर्ट भेजनी होगी।

-मल्टी विलेज योजनाएं: सिंगल विलेज रिपोर्ट के बाद मल्टी विलेज स्कीमों की भी इसी तरह से रिपोर्ट तैयार कर NJJM को भेजनी होगी।

-जियो-टैगिंग (Geo-tagging): पिछले कुछ दिनों से जलदाय विभाग के सीई (CE) जेजेएम और सीई स्पेशल प्रोजेक्ट कार्यालय द्वारा केन्द्र सरकार के सुजलम आईडी पर योजनाओं की जियो-टैगिंग के साथ विस्तृत जानकारी डालने का कार्य किया जा रहा है। एनजेजेएम की पॉलिसी के अनुसार, यह रिपोर्ट भेजने के बाद ही मैचिंग शेयर के हिसाब से स्कीम-वाइज बजट जारी किया जाएगा।

  1. 4503 करोड़ से 500 करोड़ तक का गणित:-

आवंटित 4503 करोड़ रुपये में से राजस्थान को वास्तविक राशि कितनी मिलेगी, इसे समझना जरूरी है। नियमों के अनुसार योजना में 10 प्रतिशत सहभागिता राशि (Participation Amount) और ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (O&M) का खर्चा निकाला जाएगा। इसके बाद जो बजट बचेगा, उसका केवल 50 प्रतिशत ही केन्द्र सरकार द्वारा जेजेएम के तहत राजस्थान को दिया जाएगा। इन कटौतियों और फाइनेंशियल रिकंसीलेशन के बाद, सूत्रों के अनुसार राजस्थान को केवल 500 से 600 करोड़ रुपये का ही बजट मिल पाएगा।

  1. पूर्ववर्ती सरकार के फैसले और वित्तीय बोझ:-

राज्य के सामने खड़े इस आर्थिक संकट के पीछे कुछ पुराने प्रशासनिक और वित्तीय निर्णय भी जिम्मेदार हैं:

-10 प्रतिशत सहभागिता राशि की माफी: पिछली सरकार के समय राज्य सरकार ने 10 प्रतिशत सहभागिता राशि को माफ करने की घोषणा की थी, लेकिन इसके लिए कोई वित्तीय प्रावधान राज्य सरकार की ओर से नहीं किया गया था।

-कार्यादेशों में उच्च दरें: योजनाओं के कार्यादेश (Work Orders) तय दरों से काफी अधिक दरों पर दिए गए थे, जिसके लिए केन्द्र से कोई पूर्व सहमति नहीं ली गई थी। इस कारण बढ़े हुए खर्च का पूरा भार राज्य सरकार पर आ गया है।

  1. 4000 करोड़ की देनदारियां और समाधान की चुनौती:-

राजस्थान के सामने लगभग 4000 करोड़ रुपये की देनदारियों को पूरा करने की बड़ी चुनौती है। इस वित्तीय कमी को पूरा करने के लिए राज्य सरकार हुडको (HUDCO) से लोन लेने की तैयारी कर रही है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार राज्य सरकार की स्पष्ट गारंटी के बिना हुडको से भी लोन प्राप्त करना काफी मुश्किल नजर आ रहा है।

  1. निष्कर्ष और पीएचईडी (PHED) ठेकेदारों पर असर:-

कुल मिलाकर, राजस्थान के लिए जेजेएम के आने वाले दिन मुश्किल भरे साबित हो सकते हैं, जब तक कि राज्य सरकार इसके लिए कोई विशेष बजट का प्रावधान न करे। इसका सीधा असर पीएचईडी (PHED) के ठेकेदारों पर भी पड़ेगा, जिनके बिलों और भुगतानों के लिए बजट की कमी का दौर अभी जारी रहने की आशंका है।

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