गुलाबी नगरी में शुक्रवार की सुबह लोगों के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं रही। जलदाय विभाग का गुणवत्तापूर्ण पानी देने का दावा उस समय ‘सफेद झूठ’ साबित हो गया, जब शहर की 50 लाख आबादी के घरों में बीसलपुर सिस्टम से पीला और बदबूदार पानी सप्लाई हुआ。 इस दूषित जल की वजह से पूरे शहर में हाहाकार मच गया और लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बेपटरी हो गई。
क्यों आया दूषित पानी?
बीसलपुर सिस्टम के सूरजपुरा फिल्टर प्लांट पर 216 एमएलडी के नए प्लांट से गर्मियों की मांग पूरी करने के लिए पानी की मात्रा बढ़ाई गई थी。
- अधिकारियों की आपाधापी में पानी तो बढ़ा दिया गया, लेकिन गंदगी साफ करने वाला पॉली एल्यूमिनियम क्लोराइड कैमिकल बढ़ी हुई मात्रा को शुद्ध नहीं कर सका。
- नतीजा यह हुआ कि पीला और बदबूदार पानी बालावाला पंपिंग स्टेशन पहुंचा और वहां से पूरे शहर में सप्लाई कर दिया गया。
शहर में मची त्राहि-त्राहि, विधायक ने सूंघा पानी
दूषित सप्लाई के कारण लोग न नहा सके, न पूजा कर पाए और न ही रसोई के लिए पानी भर सके。 लोगों को मजबूरी में महंगे दामों पर पानी के टैंकर मंगवाने पड़े。 हवामहल विधायक बालमुकुंदाचार्य जब नाहरगढ़ रोड पहुंचे, तो उन्होंने जलदाय इंजीनियरों को मौके पर बुलाया。 विधायक ने इंजीनियरों के सामने ही पानी को सूंघा, जो बेहद बदबूदार था。
चेतावनी को किया दरकिनार
इस संकट के पीछे विभाग की बड़ी लापरवाही भी सामने आई है:
- MNIT की रिपोर्ट: मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT) ने अपनी जांच रिपोर्ट में इस फिल्टर प्लांट के निर्माण पर गंभीर सवाल उठाए थे。
- मंत्री की राय: जलदाय मंत्री कन्हैया लाल चौधरी ने भी प्लांट को तोड़कर फिर से बनाने की बात कही थी。
- अफसरों की चुप्पी: इन सब चेतावनियों को दरकिनार कर बीसलपुर प्रोजेक्ट के अफसरों ने पानी बढ़ा दिया, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ा。
अधिकारी का तर्क: ‘यह एक सामान्य घटना’
मामले पर सफाई देते हुए जलदाय विभाग के मुख्य अभियंता (शहरी) देवराज सोलंकी ने कहा कि तापमान बढ़ने से पानी में एल्गी (काई) की मात्रा बढ़ जाती है。 जब यह क्लोरीन के संपर्क में आती है, तो पानी पीला पड़ने लगता है。 उन्होंने इसे एक सामान्य घटना बताते हुए दावा किया कि पानी के सैंपलिंग नतीजे सकारात्मक आए हैं और यह उपयोग के लिए सुरक्षित है
