भूकंप या हमला? राजस्थान में मोबाइल स्क्रीन पर ‘Extremely Severe Alert’ देख सहमे लोग, सामने आया पूरा सच

शनिवार की सुबह ठीक 11:46 बजे राजस्थान का कोना-कोना एक अजीब सी ‘सायरन’ की आवाज़ और तेज़ वाइब्रेशन से दहल उठा। जयपुर के भीड़भाड़ वाले जौहरी बाज़ार से लेकर जैसलमेर के शांत धोरों तक, हर किसी की जेब में रखा मोबाइल अचानक चिल्लाने लगा। स्क्रीन पर बड़े अक्षरों में लिखा था— “Extremely Severe Alert”

एक पल के लिए लोगों को लगा कि शायद कोई बड़ा भूकंप आया है या कोई युद्ध छिड़ गया है, लेकिन हकीकत में यह आपकी सुरक्षा के लिए किया गया भारत सरकार का एक “डिजिटल ट्रायल” था।

क्या था इस ‘सायरन’ वाले मैसेज का सच?

जैसे ही लोगों ने घबराकर अपने फोन चेक किए, उन्हें हिंदी और अंग्रेजी में एक संदेश मिला। इसमें साफ किया गया कि यह भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा किया गया एक परीक्षण संदेश (Test Message) है। इसका उद्देश्य आपदा के समय नागरिकों तक त्वरित सूचना पहुंचाना है।

साइलेंट फोन भी क्यों बजने लगे?

इस तकनीक की सबसे खास बात यह है कि इसने मोबाइल के ‘साइलेंट’ और ‘डू नॉट डिस्टर्ब’ मोड को भी दरकिनार कर दिया।

  • स्वदेशी तकनीक: यह पूरी तरह भारत में विकसित ‘सेल ब्रॉडकास्ट’ सेवा है।
  • बिना इंटरनेट काम: इसे किसी सिम नेटवर्क या डेटा की ज़रूरत नहीं होती; यह सीधे टावर के ज़रिए उस इलाके के सभी एक्टिव फोन्स पर ब्रॉडकास्ट किया जाता है।
  • सुरक्षा कवच: राजस्थान जैसे राज्य में, जहाँ अचानक बाढ़, अंधड़ या भूकंप का खतरा रहता है, वहां यह सिस्टम हज़ारों जानें बचाने में सक्षम होगा।

सोशल मीडिया पर छाया #EmergencyAlert

जैसे ही यह अलर्ट आया, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ और फेसबुक पर #EmergencyAlert ट्रेंड करने लगा। लोगों ने अपने स्क्रीनशॉट शेयर किए। हालांकि कुछ लोग इसे ‘डिजिटल हमला’ समझकर डर गए थे, लेकिन जल्द ही सरकार की ओर से स्पष्टीकरण मिलने पर स्थिति सामान्य हो गई।

विशेषज्ञों की राय: तकनीकी जानकारों का कहना है कि अगर आपके फोन में यह मैसेज नहीं आया, तो आपको अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर ‘Wireless Emergency Alerts’ को ऑन कर लेना चाहिए। यह भविष्य में किसी भी वास्तविक आपदा के समय आपके लिए ‘लाइफगार्ड’ का काम करेगा।

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