पावर सेक्टर में बड़ा उलटफेर: राजस्थान में सोलर की धमक और कम गर्मी ने घटा दी बिजली की मांग, विशेषज्ञों ने जताई हैरानी

राजस्थान में इस वर्ष अप्रेल के महीने में बिजली की खपत को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। आमतौर पर हर साल अप्रेल में तापमान बढ़ने के साथ ही बिजली की मांग में तेजी आती थी, लेकिन वर्ष 2026 में इस पुराने ट्रेंड के बिल्कुल उलट बिजली की खपत में भारी गिरावट दर्ज की गई है। बिजली कंपनियों की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले इस बार बिजली की मांग में करीब 13 प्रतिशत तक की कमी आई है।

आंकड़ों में समझें गिरावट का गणित

बिजली कंपनियों द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, अप्रेल 2025 (1 से 25 तारीख तक) में प्रदेश में कुल खपत 69441 लाख यूनिट थी। वहीं, वर्ष 2026 की समान अवधि में यह घटकर मात्र 60166 लाख यूनिट रह गई है। यानी इस बार प्रदेश में 9275 लाख यूनिट कम बिजली की खपत हुई है।

गिरावट के पीछे दो मुख्य कारण

ऊर्जा विशेषज्ञों ने इस बदलते ट्रेंड के पीछे दो प्रमुख वजहें बताई हैं:

  1. सौर ऊर्जा का बढ़ता प्रभाव: राजस्थान में सोलर ऊर्जा का उत्पादन और उपयोग बड़े पैमाने पर बढ़ा है। दिन के समय सोलर बिजली की उपलब्धता अधिक रहने के कारण ग्रिड पर पारंपरिक बिजली की मांग कम हुई है। हालांकि, सोलर से होने वाली सीधी खपत का आधिकारिक रिकॉर्ड कंपनियों के पास नहीं है।
  2. मौसम का मिजाज: इस वर्ष अप्रेल के महीने में गर्मी पिछले वर्षों के मुकाबले अपेक्षाकृत कम रही है, जिससे कूलिंग लोड (एसी, कूलर) में कमी आई है।

पावर प्लानिंग के लिए नया संकेत

ऊर्जा विशेषज्ञ डी.डी. अग्रवाल के अनुसार, यह स्थिति सामान्य नहीं है क्योंकि हर साल डिमांड बढ़ने के बजाय घट गई है। यह बदलाव भविष्य में प्रदेश के ‘एनर्जी मिक्स’ के बदलते स्वरूप को दर्शाता है। यह नया ट्रेंड भविष्य में पावर प्लानिंग और ग्रिड मैनेजमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है, जिसके लिए अब नई रणनीति बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।


विशेषज्ञ की राय: “सोलर बिजली के प्रति बढ़ते रुझान से आगामी वर्षों में प्रदेश में बिजली की पारंपरिक खपत और मांग में और भी बड़ा अंतर दिखाई देने की संभावना है। कंपनियों को अब वास्तविक खपत का पता लगाने के लिए एक फुलप्रूफ मैकेनिज्म डवलप करना होगा।”

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