भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की सुस्त रफ्तार: 90% केस अब भी फाइलों में कैद, आय से अधिक संपत्ति के मामलों में ‘क्लीन चिट’ का इंतजार?

राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की रफ्तार का हाल एसीबी के अपने आंकड़े ही बता रहे हैं। तीन साल में ‘अमीर अफसरों’ के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के 73 केस दर्ज हुए, लेकिन कोर्ट तक चालान सिर्फ एक मामले में पहुंच पाया। बाकी फाइलें जांच, रिकॉर्ड, हिसाब-किताब और मंजूरी के चक्कर में अटकी हुई हैं।

90% मामलों में कार्रवाई अब भी ‘प्रोसेस’ में

जनवरी 23 से दिसंबर 25 के बीच एसीबी ने आय से अधिक संपत्ति के 73 मामले दर्ज किए। इनमें 65 केस अब भी जांच अधिकारियों के पास लंबित हैं। यानी 90% मामलों में कार्रवाई अभी भी ‘प्रोसेस’ में है। सबसे बड़ी अड़चन अभियोजन स्वीकृति बनी हुई है। एसीबी ने 8 मामलों में संबंधित विभागों को अभियोजन स्वीकृति के प्रस्ताव भेजे, लेकिन सिर्फ 5 में मंजूरी मिली।

प्रमुख चर्चित मामले जो अब भी लंबित हैं:

केस-1. 2.31 करोड़ कैश, 1 किलो सोना मिला एसीबी ने 20 मई 23 को डीओआईटी के तत्कालीन जॉइंट डायरेक्टर वेद प्रकाश यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था। डीओआईटी ऑफिस में वेद प्रकाश की अलमारी से 2.31 करोड़ नकद और एक किलो सोने का बिस्किट मिला था। इसके बाद एसीबी ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया, लेकिन इसकी जांच अब भी चल रही है।

केस-2. एसीबी के ही एएसपी से सवा 9 लाख मिला

एसीबी चौकी झालावाड़ में तैनात एएसपी जगराम मीणा के खिलाफ एसीबी ने जुलाई 2025 में आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था। एसीबी ने जगराम के पास से सवा नौ लाख रुपए बरामद किए थे। ये रुपए वृंदावन शर्मा का होना बताया। लेकिन जब एसीबी ने क्रॉस सवाल किए तो जगराम जवाब नहीं दे पाए।

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