राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए चित्तौड़गढ़ कोतवाली थाने में तैनात पुलिसकर्मी विरेंद्र जोशी के विरुद्ध रिश्वत मांगने के आरोप में मामला दर्ज किया है। आरोपी ने एक मजदूर की चोरी हुई मोटरसाइकिल को छोड़ने और मामले को रफा-दफा करने की एवज में ‘खर्चा-पानी’ के नाम पर रिश्वत की मांग की थी।
पूरा मामला: मोटरसाइकिल की बरामदगी और रिश्वत का खेल
शिकायतकर्ता जगदीश दास रंगास्वामी (निवासी भीलवाड़ा) ने एसीबी को दी अपनी रिपोर्ट में बताया कि उनकी मोटरसाइकिल (RJ 06 JS 2437) अक्टूबर 2024 में चोरी हो गई थी।
- पुलिस का फोन: 1 अक्टूबर 2025 को चित्तौड़गढ़ कोतवाली से विरेंद्र जोशी नामक पुलिसकर्मी ने जगदीश को फोन किया और बताया कि उनकी गाड़ी मिल गई है।
- खुलेआम मांग: जब जगदीश थाने पहुंचे, तो विरेंद्र जोशी ने कहा कि उसने गाड़ी ढूंढने के लिए बहुत ‘भाग-दौड़’ की है। उसने धमकी भरे लहजे में कहा कि “कोर्ट-कचहरी के चक्कर में मत पड़ो, मुझे 5,000 रुपये दे दो, तुम्हारी गाड़ी छोड़ दूंगा।”
एसीबी का सत्यापन और डिजिटल साक्ष्य
पीड़ित जगदीश दास, जो पेशे से मजदूर हैं और बीमार भी रहते हैं, उन्होंने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का फैसला किया और भीलवाड़ा एसीबी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई।
- रिकॉर्डिंग में पुष्टि: एसीबी ने शिकायत का सत्यापन करने के लिए डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर (DVR) का उपयोग किया।
- धमकी की पुष्टि: रिकॉर्डिंग के दौरान आरोपी विरेंद्र जोशी द्वारा रिश्वत मांगने और काम न करने की एवज में परेशान करने की पुष्टि हुई।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR
एसीबी ने आरोपी विरेंद्र जोशी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत एफआईआर (0101/2026) दर्ज की है। एसीबी के अधिकारियों के अनुसार, गरीब लोगों को डरा-धमकाकर वसूली करने वाले ऐसे सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जा रही है।
वर्तमान स्थिति: एसीबी ने मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू कर दिया है। आरोपी के ठिकानों और उसकी सेवा रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वह पूर्व में भी ऐसे कृत्यों में शामिल रहा है।
