केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB), चेन्नई ने धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने के एक बड़े मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। यह मामला मुख्य रूप से विदेश मंत्रालय (MEA) के ‘ई-सनद’ (e-Sanad) पोर्टल और अन्य सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर अवैध लाभ कमाने से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
सीबीआई द्वारा 17 अप्रैल 2026 को दर्ज की गई इस एफआईआर के अनुसार, यह साजिश वर्ष 2016 से 2019 के बीच रची गई थी। जांच में सामने आया है कि:
- फर्जीवाड़ा (Forgery): आरोपियों ने सरकारी अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर और मुहरों का उपयोग कर जाली दस्तावेज तैयार किए।
- चेन्नई सिटी क्राइम ब्रांच (CCB) से हस्तांतरण: यह मामला मूल रूप से चेन्नई की सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB-I) में दर्ज था (Cr. No. 51/2020), जिसे बाद में मद्रास उच्च न्यायालय के आदेशानुसार सीबीआई को सौंप दिया गया है।
- अपराधिक साजिश: आरोपियों ने आपस में मिलकर एक संगठित गिरोह की तरह काम किया ताकि वे फर्जी दस्तावेजों को असली बताकर लोगों और सरकारी तंत्र के साथ धोखाधड़ी कर सकें।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की निम्नलिखित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:
- धारा 420: धोखाधड़ी (Cheating)।
- धारा 465: जालसाजी (Forgery)।
- धारा 468: धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी।
- धारा 471: जाली दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करना।
- धारा 34: समान इरादे से किया गया अपराधिक कृत्य।
जांच का दायरा और स्थान
घटना का मुख्य केंद्र चेन्नई का अन्ना सालई (तेनामपेट) क्षेत्र बताया गया है। सीबीआई अब उन सभी कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है जिनके माध्यम से ये फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और किन-किन व्यक्तियों ने इस जालसाजी का लाभ उठाया।
वर्तमान स्थिति: सीबीआई के पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देश पर मामला पंजीकृत कर लिया गया है। एजेंसी अब इस गिरोह के मास्टरमाइंड और इसमें शामिल अन्य संदिग्धों की धरपकड़ के लिए छापेमारी की तैयारी कर रही है।
