2 लाख की रिश्वत मांगने का आरोप: कपासन आबकारी सीआई के लिए घूस मांगते कंप्यूटर ऑपरेटर पर गिरी गाज

Rakhi Singh
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राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन में बड़ी कार्रवाई करते हुए आबकारी कार्यालय के एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। आरोपी सुरेश चन्द्र सालवी पर आरोप है कि उसने आबकारी थानाधिकारी (CI) के नाम पर एक टेम्पो चालक से उसे झूठे मुकदमे में न फंसाने की एवज में भारी भरकम रिश्वत की मांग की थी।

झूठे मुकदमे में फंसाने की दी धमकी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, परिवादी कालु सिंह, जो पेशे से एक लोडिंग टेम्पो चालक है, ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि आबकारी थाना कपासन में दर्ज एक अन्य मुकदमे में उसे और उसके टेम्पो को झूठा फंसाने की धमकी दी जा रही थी। इस संकट से बचने के लिए थानाधिकारी (सीआई) नन्दकिशोर वैष्णव के नाम पर ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) की रिश्वत मांगी गई थी। परिवादी को निर्देश दिया गया कि वह इस संबंध में कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर सुरेश चन्द्र सालवी से संपर्क करे।

₹1 लाख में हुआ सौदा, रिकॉर्डिंग में खुली पोल

एसीबी द्वारा 15 दिसंबर 2025 को शिकायत का सत्यापन किया गया। सत्यापन के दौरान कंप्यूटर ऑपरेटर सुरेश चन्द्र सालवी ने सीआई के लिए ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) की रिश्वत राशि पर सहमति जताई। एसीबी की डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर (DVR) में दर्ज बातचीत में आरोपी ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि पैसे नहीं दिए तो केस बनेगा और वकील भी उसे लूट लेगा। रिकॉर्डिंग में आरोपी को यह कहते सुना गया कि उसने सीआई साहब से बात की है और वे ₹1 लाख से कम पर नहीं मान रहे हैं।

भनक लगते ही बदली चाल, जाल बिछाने में आई बाधा

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने आरोपी को रंगे हाथों पकड़ने के लिए कई बार प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। 30 दिसंबर 2025 को जब परिवादी सीआई नन्दकिशोर वैष्णव से मिला, तो सीआई ने शक होने पर परिवादी का मोबाइल फोन करीब 5 मिनट तक चेक किया। इस घटना के बाद आरोपियों को एसीबी की कार्रवाई की भनक लग गई, जिसके चलते उन्होंने रिश्वत लेने से इनकार कर दिया और परिवादी को अपने ऑफिस से भगा दिया।

कानूनी कार्यवाही और जांच

एसीबी ने कॉल रिकॉर्डिंग और सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर सुरेश चन्द्र सालवी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत अपराध प्रमाणित पाया है। इस मामले में बिना नम्बरी एफआईआर दर्ज कर उसे मुख्यालय भेजा गया और अब इस प्रकरण की जांच पुलिस निरीक्षक डॉ. सोनू शेखावत को सौंपी गई है।

यह कार्रवाई एसीबी के उप महानिरीक्षक अनिल कयाल के निर्देशन में पूरी की गई है।

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