विशाखापत्तनम में भ्रष्टाचार का बड़ा भंडाफोड़: सीबीआई ने पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के अधिकारियों पर कसा शिकंजा

How is Director of the Central Bureau of Investigation (CBI) appointed

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने विशाखापत्तनम में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के वरिष्ठ अधिकारियों और एक निजी फर्म के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत की गई है।

क्या है पूरा मामला? सीबीआई को मिली विश्वसनीय जानकारी के अनुसार, PESO के उप-मुख्य विस्फोटक नियंत्रक (Dy. Chief Controller of Explosives) के. शिव प्रसाद और उप-विस्फोटक नियंत्रक (Dy. Controller of Explosives) वी.

सुब्रमण्यम पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। आरोप है कि ये अधिकारी निजी फर्म मैसर्स लक्ष्मी कंक्रीट वर्क्स (M/s Laxmi Concrete Works) और उसके प्रतिनिधियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रच रहे थे।

रिश्वत के बदले अनुचित लाभ एफआईआर के अनुसार, यह मामला विस्फोटक लाइसेंस जारी करने और अन्य आधिकारिक कार्यों में अनुचित लाभ देने से जुड़ा है।

  • साजिश का पर्दाफाश: अधिकारियों और फर्म के प्रतिनिधियों के बीच 5 जून 2025 के आसपास रिश्वत के लेन-देन को लेकर बातचीत हुई।
  • रिश्वत की राशि: फर्म के पार्टनर संथोष रेड्डी ने के. शिव प्रसाद को उनके आधिकारिक आवास पर 1 लाख रुपये की रिश्वत पहुंचाई थी। इसके अलावा, वी. सुब्रमण्यम को भी 10,000 रुपये की रिश्वत दी गई।
  • बिचौलिये की भूमिका: आरोप है कि के. शिव प्रसाद ने फर्म के पार्टनर को अन्य अधिकारियों से भी काम करवाने के लिए अनुचित भुगतान करने का निर्देश दिया था।

इनके खिलाफ दर्ज हुआ मामला सीबीआई, विशाखापत्तनम ने निम्नलिखित व्यक्तियों और संस्थाओं को आरोपी बनाया है:

  1. के. शिव प्रसाद, उप-मुख्य विस्फोटक नियंत्रक, PESO, विशाखापत्तनम।
  2. वी. सुब्रमण्यम, उप-विस्फोटक नियंत्रक, PESO, विशाखापत्तनम।
  3. संथोष रेड्डी, पार्टनर, मैसर्स लक्ष्मी कंक्रीट वर्क्स, खम्मम।
  4. मैसर्स लक्ष्मी कंक्रीट वर्क्स, खम्मम (प्राइवेट फर्म)।

कानूनी कार्रवाई यह एफआईआर 15 अप्रैल 2026 को दर्ज की गई है। सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित 2018) की धारा 8 और 17 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक अनुमति प्राप्त कर ली गई है और आगे का अनुसंधान (Investigation) जारी है।

Share This Article
Leave a Comment