दौसा में रिश्वतखोरी का बड़ा खुलासा: अंतरजातीय विवाह योजना में 1 लाख की डिमांड, एसीबी ने दर्ज की FIR

राजस्थान में सरकारी योजनाओं के नाम पर भ्रष्टाचार का एक और बड़ा मामला सामने आया है। दौसा जिले में अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत लाभ दिलाने के बदले 1 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का मामला उजागर हुआ है। इस संबंध में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में FIR संख्या 92/2026 दर्ज की गई है।

FIR में क्या है पूरा मामला?

एफआईआर के अनुसार परिवादी सोनू नट (उम्र 25 वर्ष) निवासी बिलोना खुर्द, तहसील लालसोट, जिला दौसा ने शिकायत दर्ज कराई कि:

  • उसने लगभग दो साल पहले अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन राशि के लिए समाज कल्याण विभाग, दौसा में आवेदन किया था
  • विभाग द्वारा बार-बार आपत्तियां लगाई जा रही थीं, जिनकी पूर्ति वह लगातार ऑनलाइन करता रहा

जब वह व्यक्तिगत रूप से विभाग पहुंचा, तो वहां तैनात वैरिफायर रितेश कुमार ने उससे रिश्वत की मांग की।

“10 लाख दिलवाऊंगा, 1 लाख दे दो”

शिकायत के मुताबिक आरोपी अधिकारी ने कहा:

  • “मैं तेरी फाइल वैरिफाई करूंगा, तभी तुझे 10 लाख रुपये मिलेंगे”
  • इसके बदले 1 लाख रुपये रिश्वत देने की मांग की गई

परिवादी ने गरीबी का हवाला देकर रकम कम करने की बात कही, लेकिन आरोपी ने अपने दो सहयोगियों के जरिए दबाव बनवाया।

दलालों की एंट्री: राजू नट और बलवान गुर्जर

एफआईआर में बताया गया है कि:

  • आरोपी रितेश कुमार ने दो लोगों — राजू नट और बलवान गुर्जर — को बीच में शामिल किया
  • इन दोनों ने परिवादी से कहा कि:
    • “1 लाख रुपये खर्चा-पानी देना पड़ेगा”
    • यह रकम पहली किश्त आने के बाद ही देनी होगी

दोनों आरोपियों ने अपने मोबाइल नंबर भी परिवादी को दिए और लगातार संपर्क बनाए रखा।

खाते में आई पहली किश्त, शुरू हुआ दबाव

  • दिनांक 30 मार्च 2026 को परिवादी के खाते में 2.5 लाख रुपये की पहली किश्त आ गई
  • इसके बाद आरोपी और उनके दलाल लगातार 1 लाख रुपये देने के लिए दबाव बनाने लगे

“मैं रिश्वत नहीं दूंगा” — शिकायतकर्ता

परिवादी ने साफ कहा कि:

  • वह अपने वैध काम के लिए रिश्वत नहीं देगा
  • बल्कि आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई चाहता है
  • उसका आरोपियों से कोई निजी विवाद या लेन-देन नहीं है

एसीबी की कार्रवाई: DVR से होगा खुलासा

मामले की गंभीरता को देखते हुए:

  • उप अधीक्षक पुलिस रविन्द्र सिंह (ACB) ने परिवादी को बुलाकर पूरी प्रक्रिया समझाई
  • रिश्वत मांग की पुष्टि के लिए:
    • DVR में 32GB मेमोरी कार्ड लगाकर रिकॉर्डिंग की तैयारी कराई गई
    • परिवादी को आरोपी से बातचीत रिकॉर्ड करने के निर्देश दिए गए

सोमनाथ सर्किल पर तय हुई मुलाकात

  • आरोपियों ने परिवादी को दौसा के सोमनाथ सर्किल पर मिलने के लिए बुलाया
  • दलाल लगातार फोन कर रिश्वत की रकम तय करने का दबाव बना रहे थे

किन धाराओं में मामला दर्ज?

एफआईआर में निम्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है:

  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7A
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 61(2)

क्या है अंतरजातीय विवाह योजना?

राजस्थान सरकार द्वारा दी जाने वाली इस योजना के तहत:

  • अंतरजातीय विवाह करने वाले दंपत्ति को आर्थिक प्रोत्साहन (करीब 10 लाख रुपये तक) दिया जाता है
  • इसका उद्देश्य सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है

लेकिन इस मामले ने दिखा दिया कि कैसे कुछ अधिकारी इस योजना को कमाई का जरिया बना रहे हैं

निष्कर्ष

दौसा का यह मामला केवल एक व्यक्ति की शिकायत नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं में जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार की बड़ी तस्वीर पेश करता है।

जहां एक ओर सरकार सामाजिक बदलाव के लिए योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ अधिकारी और उनके दलाल उसी योजना को रिश्वतखोरी का माध्यम बना रहे हैं।

अब नजर एसीबी की आगे की कार्रवाई पर है — क्या यह मामला बड़े खुलासे में बदलेगा या सिर्फ एक FIR तक सीमित रह जाएगा?

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