राजस्थान के ‘दक्षिण द्वार’ कहे जाने वाले उदयपुर-अहमदाबाद हाईवे (NH-48) पर सफर करने वालों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उदयपुर के खेरवाड़ा कस्बे में एक आधुनिक एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के लिए 363.89 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से न केवल स्थानीय निवासियों को ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी, बल्कि गुजरात और राजस्थान सीमा पर सड़क सुरक्षा भी पुख्ता होगी।
दशकों पुरानी मांग हुई पूरी
खेरवाड़ा शहर नेशनल हाईवे-48 पर स्थित एक प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है। दिल्ली से मुंबई को जोड़ने वाले इस व्यस्त मार्ग पर भारी वाहनों और स्थानीय ट्रैफिक के एक ही सड़क पर होने के कारण लंबे समय से जाम की समस्या बनी रहती थी। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों की दशकों पुरानी मांग को स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार ने अब यहाँ ‘ऊंची संरचना’ यानी एलिवेटेड रोड बनाने का निर्णय लिया है।
ब्लैक स्पॉट्स का होगा सफाया
NH-48 का यह हिस्सा अपने खतरनाक ‘ब्लैक-स्पॉट्स’ (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) के लिए भी जाना जाता है। एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से इसके दो मुख्य फायदे होंगे:
- ट्रैफिक का बँटवारा: बाहर से आने वाला ‘थ्रू-ट्रैफिक’ कस्बे के ऊपर से निकल जाएगा, जिससे नीचे की सड़कों पर दबाव कम होगा।
- हादसों में कमी: क्रॉसिंग और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में वाहनों के आपस में टकराने का जोखिम लगभग खत्म हो जाएगा, जिससे सड़क सुरक्षा मानकों में सुधार होगा।
मेवाड़-वागड़ की अर्थव्यवस्था को संबल
उदयपुर संभाग के लिए यह हाईवे एक ‘लाइफलाइन’ की तरह है। इस कॉरिडोर के निर्माण से कई क्षेत्रों को लाभ मिलेगा:
- पर्यटन: गुजरात की ओर से उदयपुर आने वाले पर्यटकों के लिए यात्रा सुगम और समय बचाने वाली होगी।
- व्यापार और लॉजिस्टिक्स: मालवाहक ट्रकों की आवाजाही तेज होने से ईंधन की खपत कम होगी और माल की डिलीवरी समय पर हो सकेगी।
- स्थानीय राहत: शहर के नीचे की सड़कों पर स्थानीय वाहनों, पैदल यात्रियों और दुकानदारों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार होगा।
आधुनिक तकनीक और सांसद के प्रयास
इस परियोजना को लेकर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत लगातार प्रयासरत थे। उन्होंने इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का आभार जताया है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस कॉरिडोर के लिए टेंडर और निर्माण प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए हैं, ताकि जल्द ही धरातल पर काम शुरू हो सके।
