जयपुर: साइबर ठगों के उस नेटवर्क पर जयपुर सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है, जिसने कथित तौर पर ‘बॉस स्कैम’ के जरिए 6.80 करोड़ रुपए की ठगी को अंजाम दिया। पुलिस ने इस मामले में ओडिशा के भुवनेश्वर से कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर विश्वजीत को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी के बैंक खाते में साइबर ठगी से जुड़े करीब दो करोड़ रुपए का लेनदेन सामने आया है। मामले में अब तक 11 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी एसएसजीसी इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड का मैनेजिंग डायरेक्टर है। तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रेल के आधार पर पुलिस को उसकी भूमिका संदिग्ध मिली। आरोपी के आईसीआईसीआई बैंक खाते में करीब दो करोड़ रुपए की रकम आई थी, जिसे बाद में अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया। पुलिस अब इन खातों और रकम के अंतिम इस्तेमाल की कड़ियां जोड़ रही है।
कमीशन का लालच… फिर खाते और बैंकिंग डिटेल्स का खेल
पूछताछ में पुलिस के सामने ठगी के नेटवर्क के काम करने का तरीका भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार साइबर ठग पहले लोगों से व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क करते थे। फर्जी पहचान और प्रोफाइल के माध्यम से सामने वाले का विश्वास जीता जाता था। इसके बाद उन्हें कमीशन, सब्सिडी, टैक्स में छूट और एमएसएमई लोन दिलाने का झांसा दिया जाता था।
ठगों के झांसे में आने के बाद पीड़ितों से बैंक खाते, एटीएम और सिम जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कराया जाता था। आरोप है कि इन खातों में साइबर अपराध से हासिल रकम पहुंचने के बाद उसे तेजी से दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था।
लेयरिंग के लिए बदले जाते थे पैसे के रास्ते
पुलिस जांच में सामने आया कि रकम को सीधे एक खाते में रखने के बजाय कई स्तरों पर ट्रांसफर किया जाता था। खाते में पैसा आते ही उसे आरटीजीएस, चेक, यूपीआई या क्यूआर कोड के माध्यम से दूसरे खातों में भेज दिया जाता था। इसके बाद रकम को अलग-अलग माध्यमों से आगे बढ़ाया जाता था।
पुलिस के अनुसार ठगी की रकम को बाइनेंस जैसे प्लेटफॉर्म पर यूएसडीटी क्रिप्टो करेंसी में बदलने की बात भी सामने आई है। इसके बाद टेलीग्राम और क्यूआर कोड के जरिए रकम को कथित तौर पर मास्टरमाइंड तक पहुंचाया जाता था। पुलिस अब इस पूरी मनी ट्रेल की जांच कर रही है।
ओडिशा तक पहुंची पुलिस की जांच
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी विश्वजीत से जुड़े लोगों ने साइबर ठगों को बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने में कथित भूमिका निभाई। 21 अगस्त 2026 को पश्चिम बंगाल के दीघा में एक संदिग्ध से मुलाकात के बाद पुलिस को जांच में महत्वपूर्ण सुराग मिले। इसके बाद बैंक खातों, मोबाइल सिम, इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन की जांच की गई।
पुलिस के मुताबिक कमीशन के लालच में आरोपी ने बैंक खाते से जुड़े मोबाइल सिम, इंटरनेट बैंकिंग आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराए थे। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 6.80 करोड़ रुपए की कथित ठगी में रकम किन-किन खातों से होकर गुजरी और इस नेटवर्क के पीछे बैठे मुख्य आरोपियों तक पैसा कैसे पहुंचा।
जांच जारी है और पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग ट्रेल तथा आरोपियों के आपसी संपर्कों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है।