बिनोता: मकर संक्रांति पर गौ-सेवा का अनूठा संकल्प, 21 फीट की धर्म ध्वजा फहराई; गौसेवक ने त्यागे जूते-चप्पल

चित्तौड़गढ़, उपखंड के बिनोता गांव में मकर संक्रांति के पावन पर्व पर भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कृष्ण गौशाला की भूमि पर ओघड़ बावजी के भोपाजी यशवंत गुरुदेव के सानिध्य में 21 फीट ऊंची धर्म ध्वजा का रोहण किया गया। इस दौरान पूरा क्षेत्र ‘गौमाता की जय’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

गुरुदेव ने दिया सेवा का संदेश

कार्यक्रम में विशेष रूप से पधारे यशवंत गुरुदेव ने गौसेवकों के उत्साह को देखकर उनकी सराहना की। उन्होंने अपने उपदेश में कहा कि “गौमाता के प्रति ऐसा ही जुनून हर गांव और हर व्यक्ति के मन में होना चाहिए।” उन्होंने निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया, जिस पर उपस्थित भक्तों ने सेवा का सामूहिक संकल्प लिया।

गौसेवक का कठोर संकल्प: “जब तक गौशाला नहीं बनेगी, जूते नहीं पहनूंगा”

इस अवसर पर गौसेवक दुर्गाशंकर वैष्णव ने अपनी अटूट श्रद्धा का परिचय देते हुए एक कठोर संकल्प लिया। उन्होंने घोषणा की कि जब तक श्री कृष्ण गौशाला का निर्माण पूर्ण रूप से नहीं हो जाता, तब तक वे अपने पैरों में जूते-चप्पल नहीं पहनेंगे और केवल गौमाता के दूध का ही सेवन करेंगे। उनके इस संकल्प की पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है।

भामाशाहों ने बढ़ाया मदद का हाथ

मकर संक्रांति के अवसर पर शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों, पुलिसकर्मियों, राजस्व और रॉयल्टी विभाग सहित कई भामाशाहों ने गौशाला निर्माण के लिए अपना योगदान दिया। दिन भर चले इस आयोजन में ग्रामीणों ने नाचते-गाते हुए कस्बे में भ्रमण किया और जनसहयोग जुटाया। शाम को गौसेवकों द्वारा संयुक्त रूप से गौमाता को लापसी खिलाई गई और सुबह हरा चारा व गुड़ का वितरण किया गया।

जनसहयोग से बनेगा निराश्रित जीवों का आश्रय

ग्रामवासियों और गौशाला समिति के सदस्यों ने संकल्प लिया है कि जनसहयोग के माध्यम से यहां एक विशाल गौशाला का निर्माण किया जाएगा, ताकि क्षेत्र की निराश्रित गौवंश को बेहतर संरक्षण और आश्रय मिल सके।

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