राजस्थान ड्रग अलर्ट: जिन दवाओं को आप समझ रहे थे ‘असरदार’, जांच में निकलीं ‘नकली’, 7 महीने में 133 ब्रांडेड मेडिसिन फेल

जयपुर। राजस्थान में अक्सर सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली निःशुल्क दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब बाजार में बिकने वाली महंगी और ‘ब्रांडेड’ दवाओं की चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। राजस्थान के औषधि नियंत्रण आयुक्तालय (Drug Control Commissionerate) की पिछले सात महीने की जांच रिपोर्ट ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। प्रदेश में 133 ब्रांडेड दवाएं जांच में बेकार और अमानक साबित हुई हैं।

जिन दवाओं को लोग ‘ब्रांडेड’ मानकर ज्यादा कीमत देकर खरीद रहे थे, उन्हीं में बीमारी को ठीक करने वाला सक्रिय तत्व (Active Ingredient) या तो मानकों से बेहद कम मिला या पूरी तरह से गायब था।

3 साल में 217 दवाएं फेल, 25 निकलीं ‘नकली’

औषधि नियंत्रण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन सालों में सरकारी लैब में जांची गई 217 दवाएं ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ (NSQ) घोषित हुई हैं। इनमें से 25 सैंपल पूरी तरह से नकली (Spurious) पाए गए। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि 133 तरह की ब्रांडेड दवाएं और कॉस्मेटिक उत्पाद भी जांच में फेल हो गए हैं। ये दवाएं जयपुर, बद्दी, देहरादून, हरिद्वार, पालघर, गुजरात और हिमाचल प्रदेश की विभिन्न कंपनियों द्वारा बनाई गई थीं।

इन गंभीर बीमारियों की दवाएं हुईं फेल:

  • दवाओं की श्रेणियां: एसिडिटी, एंटीबायोटिक, एलर्जी, खांसी, डिप्रेशन, दर्द, मल्टीविटामिन और बच्चों की दवाएं।
  • शून्य असर: एलर्जी की एक दवा में तो इलाज करने वाला सक्रिय तत्व ही शून्य (Zero) मिला।
  • तत्वों की कमी: कई एंटीबायोटिक दवाओं में क्लेव्यूलैनिक एसिड नहीं मिला, जबकि मल्टीविटामिन टैबलेट में जरूरी ‘विटामिन डी’ मानकों से काफी कम पाया गया।

बिना लाइसेंस चल रहा मौत का कारोबार

राजस्थान में नकली और अमानक दवाओं का नेटवर्क लगातार फैल रहा है। दिसंबर 2025 में जयपुर की एक फर्म पर हुई बड़ी कार्रवाई के दौरान ₹3.73 करोड़ की दवाएं जब्त की गई थीं। जांच में पता चला कि यह फर्म बिना किसी वैध लाइसेंस के नकली और अमानक दवाओं के बड़े कारोबार में शामिल थी।

इन्हें मिल चुकी है सजा (कोर्ट की कार्रवाई):

नकली दवा बेचने और बनाने के आरोप में दोषियों को सजा भी सुनाई जा चुकी है:

  • लोकेश चंचलानी: 3 साल की कैद, ₹1 लाख जुर्माना।
  • दुर्गा मेडिकल एजेंसी: 1 साल की कैद, ₹20 हजार जुर्माना।
  • प्रेम लालवानी: 3 साल की कैद, ₹50 हजार जुर्माना।
  • हनुमान खंडेलवाल: 3 साल की कैद, ₹10 हजार जुर्माना।

निःशुल्क बनाम ब्रांडेड: कहां हो रही है चूक?

सरकारी और बाजार की दवाओं की जांच प्रक्रिया में एक बड़ा अंतर है:

  • सरकारी (निःशुल्क) दवाओं की त्रिस्तरीय जांच:
    1. निर्माता स्तर पर गुणवत्ता परीक्षण।
    2. राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (RMSCL) द्वारा खरीद से पहले NABL मान्यता प्राप्त लैब में जांच।
    3. बाजार और अस्पतालों से रैंडम सैंपलिंग कर दोबारा जांच।
  • ब्रांडेड (बाजार की) दवाएं: निर्माता स्वयं गुणवत्ता रिपोर्ट (Quality Report) जारी कर दवा सीधे बाजार में उतार देते हैं। बाद में ड्रग विभाग केवल रैंडम सैंपल उठाकर जांच करता है। शिकायत मिलने या सैंपल फेल होने के बाद ही कार्रवाई होती है।

कब कितने सैंपल हुए फेल? (अक्टूबर 2025 से मई 2026 तक)

वर्षतारीखफेल दवाओं की संख्या
202619 मई08
04 मई05
22 अप्रैल07
15 अप्रैल01
10 अप्रैल02
08 अप्रैल04
03 अप्रैल01
17 मार्च02
12 मार्च08
20 फरवरी11
17 फरवरी04
04 फरवरी08
02 फरवरी01
20 जनवरी10
07 जनवरी10
01 जनवरी01
202523 दिसंबर01
20 दिसंबर11
17 दिसंबर06
18 नवम्बर06
06 नवम्बर07
31 अक्टूबर01
24 अक्टूबर09
09 अक्टूबर08
05 अक्टूबर01

विभाग का क्या कहना है?

“विभाग की ओर से निजी दवा बाजार से लगातार सैंपल उठाए जाते हैं। अमानक और नकली दवा के नमूनों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर ड्रग अलर्ट जारी किया जाता है। इसके बाद स्टॉक हटाने के आदेश दिए जाते हैं और दोषियों पर कड़ी विधिक कार्यवाही की जाती है।”

– अजय फाटक, औषधि नियंत्रक, राजस्थान

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