झालावाड़ में कल किसकी लगेगी क्लास? पूर्व CM राजे का ‘एक्शन मोड’, पीएचईडी महकमे में हड़कंप!

जयपुर। झालावाड़ जिले में गहराते पेयजल संकट और दम तोड़ती जल योजनाओं को लेकर अब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने मोर्चा संभाल लिया है। रविवार को होने वाली एक हाई-प्रोफाइल समीक्षा बैठक ने राजस्थान के प्रशासनिक और सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सवाल ये भी उठता है कि आखिर अचानक से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे झालावाड़ जिले की पेयजल व्यवस्थाओं को लेकर बैठक क्यों ले रही है। सूत्रों की मानें तो कल की बैठक में कई बड़े अधिकारियों की ‘क्लास’ लगना तय है।

मंत्री से लेकर संतरी तक सब ‘अलर्ट’ पर:-

इस बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राजे ने राज्य के पीएचईडी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी को भी इसमें आमंत्रित किया है। मंत्री ने भी इस बैठक को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हुए विभाग के 4 सबसे ताकतवर चीफ इंजीनियर्स (CES) को पूरी तैयारी के साथ झालावाड़ पहुंचने के कड़े निर्देश दिए हैं।

बैठक में मौजूद रहेंगे ये बड़े चेहरे:

देवराज सोलंकी – सीई (शहरी)

राजसिंह – सीई (स्पेशल प्रोजेक्ट्स)

भवानी सिंह – सीई (जेजेएम)

सुरेन्द्र शर्मा – सीई (ग्रामीण)

ग्राउंड जीरो पर क्यों है गुस्सा?

झालावाड़, जो खुद जल स्रोतों के मामले में समृद्ध माना जाता है, वहां आज पीने के पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है। ‘Expose Now’ की पड़ताल के अनुसार, जिले में पेयजल किल्लत के पीछे सबसे बड़ा कारण वाटर प्रोजेक्ट्स का अधूरा होना और फाइलों का कछुआ चाल से चलना है। विशेष रूप से जल जीवन मिशन (JJM) और बड़े वाटर प्रोजेक्ट्स के लक्ष्य केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। अधूरे पाइपलाइन नेटवर्क और ठप पड़े पंपिंग स्टेशनों के कारण ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी भयावह है।

रविवार की छुट्टी रद्द, तैयारियों में जुटे इंजीनियर:-

आमतौर पर रविवार को अवकाश मनाने वाले पीएचईडी के इंजीनियर आज दफ्तरों में पसीना बहा रहे हैं। राजे की कार्यशैली और डेटा पर उनकी पकड़ से वाकिफ अधिकारी पुराने रिकॉर्ड खंगालने और अधूरे प्रोजेक्ट्स के लिए बहाने ढूंढने में जुटे हैं।

कल की बैठक में राजे मुख्य रूप से शहरी जलापूर्ति, ग्रामीण ढांचा, जेजेएम की प्रगति और पेंडिंग पड़े बड़े प्रोजेक्ट्स की समीक्षा करेंगी। बैठक में प्रोजेक्ट्स में देरी और पेयजल समस्याओं को लेकर इंजीनियर्स व अधिकारियों की क्लास भी लग सकती है। देखना यह होगा कि इस बैठक के बाद झालावाड़ की जनता को पानी मिलता है या सिर्फ आश्वासन की एक और किश्त !

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now

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