सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: अब हर पुलिस स्टेशन में CCTV और ऑडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य

Rakhi Singh
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मानवाधिकारों की रक्षा और हिरासत में प्रताड़ना रोकने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को मिले मौलिक अधिकारों को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम है ।

फैसले की मुख्य बातें:

  • हर कोने पर नज़र: देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को हर पुलिस स्टेशन के प्रवेश, निकास, लॉक-अप, गलियारों, लॉबी, रिसेप्शन और इंस्पेक्टर के कमरों सहित सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर CCTV कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं ।
  • ऑडियो और नाइट विजन: ये कैमरे न केवल वीडियो बल्कि ऑडियो रिकॉर्डिंग से भी लैस होंगे और इनमें नाइट विजन की सुविधा होनी अनिवार्य है ।
  • 18 महीने का बैकअप: कोर्ट ने आदेश दिया है कि CCTV फुटेज को कम से कम 18 महीने तक सुरक्षित रखना होगा । यदि वर्तमान तकनीक में यह संभव न हो, तो भी कम से कम 1 साल का डेटा रखना अनिवार्य है ।
  • जांच एजेंसियों पर भी लागू: यह आदेश केवल पुलिस स्टेशनों तक सीमित नहीं है। अब CBI, NIA, ED, NCB, DRI और SFIO जैसी केंद्रीय एजेंसियों के कार्यालयों में भी, जहाँ पूछताछ की जाती है, CCTV लगाना अनिवार्य होगा ।
  • निगरानी समितियां (Oversight Committees): आदेश के पालन के लिए राज्य स्तर (SLOC) और जिला स्तर (DLOC) पर निगरानी समितियां बनाई जाएंगी । थाने के SHO की जिम्मेदारी होगी कि वे कैमरों के खराब होने की सूचना तुरंत जिला समिति को दें ।
  • शिकायत का अधिकार: हर थाने के बाहर हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में बड़े पोस्टर लगाए जाएंगे, जो जनता को बताएंगे कि परिसर CCTV की निगरानी में है और उन्हें मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायत करने का अधिकार है ।

कोर्ट की सख्ती: जस्टिस आर. एफ. नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने नाराजगी जताई कि 2018 के आदेश के बावजूद अब तक इस दिशा में कोई ठोस काम नहीं हुआ है । सभी राज्यों को 6 सप्ताह के भीतर इस आदेश को लागू करने का ठोस एक्शन प्लान दाखिल करने का निर्देश दिया गया है

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