-11.74 अंक लाने वाले का भी पात्रता सूची में नाम! RPSC की वेटरनरी ऑफिसर भर्ती विवादों में, आयोग को देनी पड़ी सफाई

अजमेर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) एक बार फिर अपनी अजीबोगरीब परीक्षा प्रणाली को लेकर विवादों और सुर्खियों में आ गया है। आयोग द्वारा आयोजित वेटरनरी ऑफिसर (पशु चिकित्सा अधिकारी) भर्ती परीक्षा का अस्थायी (प्रोविजनल) परिणाम जारी होते ही बड़ा बवाल मच गया है। इस परीक्षा की विचारित सूची में ऐसे अभ्यर्थियों के भी नाम शामिल हैं, जिनके अंक माइनस (नकारात्मक) में आए हैं। कट-ऑफ का विश्लेषण करने पर सामने आया है कि कुछ उम्मीदवार माइनस 11.74 (-11.74) अंक प्राप्त करने के बावजूद पात्रता सूची में जगह बनाने में सफल रहे हैं।

इस खुलासे के बाद से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और विशेषज्ञों के बीच मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले को बढ़ता देख अब आरपीएससी को इस पर आधिकारिक सफाई देनी पड़ी है।

1100 पदों के लिए जारी हुई है विचारित सूची

यह पूरा मामला पशुपालन विभाग में वेटरनरी ऑफिसर के 1100 पदों के लिए आयोजित की गई भर्ती परीक्षा से जुड़ा हुआ है। आयोग ने बीते 16 जून को इस भर्ती की विचारित सूची (विस्तारित पात्रता सूची) जारी की थी। इस सूची में कुल 2,165 अभ्यर्थियों को अस्थायी रूप से दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) के लिए शामिल किया गया है। लेकिन जब अभ्यर्थियों ने कट-ऑफ देखी, तो वे यह देखकर हैरान रह गए कि माइनस मार्किंग के बावजूद ऋणात्मक अंक वाले उम्मीदवार भी दौड़ में बने हुए हैं।

आयोग की सफाई: “न्यूनतम अंकों की कोई बाध्यता नहीं थी”

मामले पर चौतरफा घिरने के बाद आरपीएससी के मुख्य परीक्षा नियंत्रक आशुतोष गुप्ता और सचिव रामनिवास मेहता ने स्थिति स्पष्ट की है। आयोग का कहना है कि इस परीक्षा के नियमों में ‘न्यूनतम अंक’ (Minimum Qualifying Marks) प्राप्त करने की कोई शर्त या बाध्यता निर्धारित नहीं थी। नियम न होने के कारण, जिन आरक्षित श्रेणियों में पद खाली थे, वहां माइनस अंक लाने वाले अभ्यर्थियों को भी नियमानुसार विचारित सूची में स्थान देना पड़ा।

RPSC सचिव रामनिवास मेहता का बयान: “यह केवल एक प्रोविजनल (अस्थायी) सूची है, इसे किसी भी स्थिति में अंतिम चयन सूची न माना जाए। पूरी प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार ही की जा रही है और इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं है।”

भविष्य में नियम बदलने के लिए भेजा जाएगा सुझाव

आयोग के मुख्य परीक्षा नियंत्रक आशुतोष गुप्ता ने बताया कि वर्तमान भर्ती नियमों के आधार पर ही यह परिणाम तैयार किया गया है। हालांकि, परीक्षा प्रणाली पर उठ रहे सवालों को देखते हुए आयोग ने माना है कि इस पूरी स्कीम की समीक्षा की जानी चाहिए। भविष्य में ऐसी असहज करने वाली स्थिति दोबारा पैदा न हो, इसके लिए आरपीएससी जल्द ही पशुपालन विभाग और कार्मिक विभाग को नियमों में संशोधन के आवश्यक सुझाव भेजेगा, ताकि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और मजबूती आ सके।

ओएमआर शीट में गलती करने पर 22 अभ्यर्थी अयोग्य घोषित

इसके साथ ही आयोग ने नियमों की कड़ाई का हवाला देते हुए बताया कि ओएमआर (OMR) उत्तर पत्रक में एक बड़ी लापरवाही के कारण 22 अभ्यर्थियों को परीक्षा से अयोग्य घोषित कर दिया गया है। इन अभ्यर्थियों ने परीक्षा के दौरान 10 प्रतिशत से अधिक प्रश्नों में किसी भी विकल्प (पांचवें विकल्प सहित) को नहीं भरा था। इन सभी अयोग्य घोषित किए गए उम्मीदवारों के रोल नंबर आरपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं।

आयोग के अनुसार, अब इस प्रोविजनल सूची में शामिल सभी 2165 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी। दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने और संबंधित विभाग की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही मुख्य और अंतिम चयन सूची जारी की जाएगी।


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