जयपुर: राजस्थान के सीमावर्ती और मरुस्थलीय जिलों में मौसम ने अचानक ऐसी भयानक करवट ली है कि भीषण गर्मी से तप रहा थार का रेगिस्तान पानी-पानी हो गया है। बाड़मेर और जैसलमेर समेत राज्य के कई हिस्सों में आधी रात को तेज आंधी के बवंडर के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। इस आकस्मिक मौसमी बदलाव से जहां एक तरफ लोगों को झुलसाने वाली लू और उमस से बड़ी राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ तेज हवाओं के कारण कई इलाकों में पेड़ और बिजली के पोल धराशायी हो गए हैं।
बाड़मेर में सड़कों पर बही पानी की चादर, जैसलमेर के तालाब लबालब
चंद घंटों की आक्रामक और मूसलाधार बारिश के कारण बाड़मेर शहर का नजारा पूरी तरह बदल गया। मुख्य मार्गों और निचले इलाकों में पानी की मोटी चादर चलती हुई दिखाई दी, जिससे देर रात चौराहों पर आवागमन पूरी तरह थम गया।
दूसरी ओर, स्वर्ण नगरी जैसलमेर और उसके ग्रामीण अंचलों पर इंद्रदेव इस कदर मेहरबान हुए कि वहां के स्थानीय और ऐतिहासिक तालाबों में बरसाती पानी की भारी आवक दर्ज की गई है। स्थानीय प्रशासन और निवासियों के अनुसार, इन तालाबों के भरने से आने वाले शुष्क और गर्मी के महीनों में पानी का संकट काफी हद तक कम हो जाएगा।
क्यों बदला अचानक मौसम? जानिए वैज्ञानिक कारण
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, यह अचानक आया बदलाव स्थानीय स्तर पर बने एक मजबूत चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) और अरब सागर से आ रही लगातार नम हवाओं के चलते दर्ज किया गया है। इस सिस्टम ने पिछले कई दिनों से रिकॉर्ड तोड़ रहे पारे को पल भर में नीचे गिरा दिया और हवा में अच्छी-खासी ठंडक घोल दी। रात में तापमान गिरने से लोगों ने लंबे समय बाद कूलर-एसी बंद कर चैन की नींद ली।
आंधी का तांडव: 80 किमी/घंटा की रफ्तार से चलीं हवाएं, बिजली ठप
राहत के साथ-साथ इस तूफान ने क्षेत्र में काफी नुकसान भी पहुंचाया है। जैसलमेर के चांधन क्षेत्र में हवा की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटा मापी गई। धूल भरी आंधी के कारण पूरे इलाके में कुछ समय के लिए घने अंधेरे का गुब्बार छा गया। तेज हवाओं के झोंकों से प्राचीन पेड़ उखड़ गए और बिजली के खंभे गिर गए, जिससे कई ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। डिस्कॉम (Discom) की टीमें सुबह से ही विद्युत सेवा बहाल करने में जुटी हुई हैं।
पशुपालकों के चेहरे खिले, चारे का संकट होगा खत्म
इस बारिश ने थार के ग्रामीण इलाकों के पशुपालकों के मन में एक नई उम्मीद जगा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि इस ताजा तरीन बारिश के बाद अब बीहड़ों और चरागाहों में हरी घास उगने की पूरी संभावना है। चरागाहों के समृद्ध होने से मवेशियों के लिए चारे की किल्लत खत्म हो जाएगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।
राज्य के अन्य जिलों का हाल: कहीं ओले तो कहीं भारी बारिश
| जिला / क्षेत्र | बारिश के आंकड़े (MM) / मौसम का हाल | मुख्य प्रभाव |
| पिलानी (झुंझुनू) | 50.4 mm (सर्वाधिक बारिश) | न्यूनतम तापमान गिरकर 19.6°C पर पहुंचा, भारी ठंडक |
| चूरू | 29 mm | उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत |
| झुंझुनू | 9 mm | हल्की से मध्यम बारिश दर्ज |
| बीकानेर | 3.8 mm | धूल भरी आंधी के बाद रिमझिम फुहारें |
| हनुमानगढ़ (संगरिया) | 3.5 mm | मौसम खुशनुमा हुआ |
| डीडवाना (कुचामन) | आंधी के साथ बारिश और ओलावृष्टि | अधिकतम तापमान जो 42°C था, उसमें भारी गिरावट |
| सीकर | 10 से 15 मिनट झमाझम बारिश | सड़कों पर पानी बहा, शाम को अचानक बदला मौसम |
| कोटा | तेज आंधी और बारिश | छावनी क्षेत्र में पेड़ गिरने से कई मोटरसाइकिलें दबीं, कोई जनहानि नहीं |
तापमान के आंकड़े: पिछले 24 घंटों में राज्य का सर्वाधिक अधिकतम तापमान फलौदी में 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान पिलानी में 19.6 डिग्री सेल्सियस रहा। जोधपुर और बीकानेर में न्यूनतम तापमान 30.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।