जयपुर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ‘सुशासन’ और ‘जन-संवेदना’ को धरातल पर उतार रही है। प्रदेशवासियों की समस्याओं के त्वरित और पारदर्शी समाधान के लिए स्थापित राजस्थान संपर्क पोर्टल और हेल्पलाइन 181 आज सरकार और जनता के बीच संवाद का सबसे विश्वसनीय माध्यम बन चुके हैं। मुख्यमंत्री स्वयं समय-समय पर कॉल सेंटर पहुँचकर आमजन की समस्याओं को सुनते हैं, जिससे प्रशासनिक तंत्र में तत्परता और जवाबदेही बढ़ी है।
एक प्लेटफॉर्म, अनेक समाधान: कैसे काम करती है 181?
यह प्रणाली एक एकीकृत शिकायत निवारण तंत्र (Integrated Grievance Redressal System) के रूप में कार्य करती है। 181 पर कॉल करते ही शिकायत संबंधित विभाग को ऑनलाइन भेज दी जाती है, जिसकी निगरानी उच्च स्तर पर की जाती है। निस्तारण के बाद परिवादी से फीडबैक भी लिया जाता है।
सफलता की कहानियाँ: शिकायतों पर ‘एक्शन’ की कुछ झलकियाँ
हाल के महीनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ राजस्थान संपर्क पोर्टल के हस्तक्षेप से बरसों पुराने या जटिल कार्य कुछ ही घंटों में पूरे हुए:
| परिवादी एवं जिला | समस्या का स्वरूप | दर्ज दिनांक | समाधान दिनांक | विभाग |
| प्रभुराम (हनुमानगढ़) | जाति प्रमाण पत्र में विलंब | 11 अक्टूबर | 13 अक्टूबर | राजस्व विभाग |
| शिवानी (कोटा) | जनआधार में आय अपडेट | 25 नवंबर | 28 नवंबर | सांख्यिकी विभाग |
| श्यामलाल (भीलवाड़ा) | खेत की बिजली आपूर्ति बाधित | 26 नवंबर | 28 नवंबर | विद्युत निगम |
| रवि (बारां) | नाले की सफाई | 02 दिसंबर | 02 दिसंबर (उसी दिन) | नगर पालिका |
| महेश कुमार (सलूम्बर) | पाइपलाइन मरम्मत | 05 दिसंबर | 07 दिसंबर | PHED (पेयजल) |
सफाई से लेकर बिजली-पानी तक, तुरंत कार्रवाई
- सफाई व्यवस्था: बीकानेर के गोविंद सिंह ने 11 दिसंबर को सफाई न होने की शिकायत की, जिस पर नगरपालिका ने तत्काल संज्ञान लेते हुए क्षेत्र को स्वच्छ बनाया।
- पेयजल संकट: सवाई माधोपुर के बोली क्षेत्र में खराब हैंडपंप की शिकायत श्री दिनेश कुमार ने 12 अक्टूबर को दर्ज कराई और मात्र 24 घंटे के भीतर 13 अक्टूबर को हैंडपंप ठीक कर दिया गया।
जनसेवा की सच्ची पहचान
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का स्पष्ट विजन है कि कोई भी नागरिक अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटे। राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन इसी दिशा में एक ऐसा सेतु है जहाँ हर शिकायत न केवल सुनी जाती है, बल्कि जमीनी स्तर पर उसकी कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। यही कारण है कि आज 181 हेल्पलाइन प्रदेशवासियों के अटूट विश्वास का प्रतीक बन गई है।
