जयपुर। राजस्थान में पारा 45 डिग्री के पार है, आसमान से आग बरस रही है और इसी बीच प्रदेश की जनता पर जल संकट की तलवार लटक गई है। पीएचईडी (PHED) ठेकेदारों की ‘करो या मरो’ की चेतावनी ने सरकार के पसीने छुड़ा दिए हैं। आनन-फानन में सरकार ने अमृत-2.0 के तहत 107 करोड़ रुपये का झुनझुना तो थमाया है, लेकिन सवाल वही है—क्या इतने से प्रदेश की प्यास बुझेगी?

ऊंट के मुंह में जीरा: 4500 करोड़ का बकाया, मिला सिर्फ 2%
ठेकेदारों का गुस्सा जायज है। जहां बकाया 4500 करोड़ रुपये से अधिक है, वहां सरकार ने अमृत-2.0 योजना के नाम पर महज 107 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह कुल बकाये का 3 प्रतिशत भी नहीं है।
बकाया राशि: 4500+ करोड़
जारी बजट: 107 करोड़
सवाल: क्या इतने बजट से पाइपलाइनों की मरम्मत, टैंकरों का संचालन और नए प्रोजेक्ट्स पूरे हो पाएंगे?
‘करो या मरो’ की राह पर ठेकेदार
पीएचईडी ठेकेदारों ने साफ कर दिया है कि अगर उनका पूरा भुगतान नहीं हुआ, तो वे काम बंद कर देंगे। अगर हड़ताल होती है, तो राजस्थान के शहरी और ग्रामीण इलाकों में हाहाकार मचना तय है।

Expose Now इनसाइडर: सूत्रों की मानें तो ठेकेदारों का कहना है कि सरकार सिर्फ वक्त काट रही है। 107 करोड़ की यह राशि केवल उन प्रोजेक्ट्स के लिए है जो अमृत-2.0 के तहत आते हैं, जबकि जबकि जल जीवन मिशन में 3500 करोड़ से ज्यादा का भुगतान बकाया है, लेकिन उसके लिए राज्य सरकार की ओर से कोई बजट जारी नहीं किया गया है। केन्द्र सरकार ने जेजेएम में राजस्थान को 4503 करोड़ का कंडीशनल बजट तो जारी कर दिया, लेकिन हकीकत में शर्तों की पालना करने के बाद जलदाय विभाग को मुश्किल से 500 करोड़ का बजट मिल पाएगा। जब संकट 4500 करोड़ का है, तो 107 करोड़ देकर जनता को गुमराह क्यों किया जा रहा है?
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now
