जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनावों (2026) के बाद मेयर, सभापति और पालिकाध्यक्ष पदों की तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी 301 नगरीय निकाय प्रमुखों की अंतिम परिणाम सूची के अनुसार, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना भारी दबदबा कायम रखा है। कुल 301 शहरी निकायों में से 197 पर भाजपा ने अपना बोर्ड बनाया है, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस 94 निकायों तक सीमित रह गई है।
इस चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इसके अलावा 7 निर्दलीय प्रत्याशी भी निकाय प्रमुख बनने में कामयाब रहे हैं।
7 नगर निगमों का हाल: 6 पर BJP, 1 पर कांग्रेस इस चरण में 7 शहरों— अजमेर, अलवर, भरतपुर, भीलवाड़ा, पाली, उदयपुर और बीकानेर में महापौर का चुनाव हुआ। इनमें से 6 नगर निगमों में भाजपा का मेयर बना है, जबकि केवल बीकानेर में कांग्रेस अपना महापौर बनाने में सफल रही। (जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों में मेयर का चुनाव बाद में होना है)।
- भरतपुर और भीलवाड़ा: यहां भाजपा की अनुराधा सिंह (भरतपुर) और जसवंत कंवर (भीलवाड़ा) निर्विरोध महापौर चुनी गईं।
- उदयपुर और अलवर: उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी को 55 वोट मिले। वहीं, अलवर में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल 42 मतों के साथ महापौर निर्वाचित हुईं।
- बीकानेर: कांग्रेस के अनिल कल्ला (पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला के भतीजे) ने 50 वोट हासिल कर भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को 20 मतों से करारी शिकस्त दी।
अजमेर और पाली: बहुमत कांग्रेस का, लेकिन बाजी मारी भाजपा ने निकाय प्रमुख के चुनावों में सबसे बड़ा उलटफेर अजमेर और पाली नगर निगम में देखने को मिला।
- अजमेर: 80 सदस्यीय निगम में कांग्रेस के 37 और भाजपा के 32 पार्षद जीते थे। बहुमत के लिए 41 मत जरूरी थे। गुप्त मतदान में भारी क्रॉस-वोटिंग हुई और भाजपा की अनामिका शर्मा को 43 वोट मिल गए। कांग्रेस की किरण गढ़वाल को केवल 37 वोट ही मिल पाए।
- पाली: 65 सदस्यीय निगम में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी (29 पार्षद) थी, जबकि भाजपा के पास 21 पार्षद थे। लेकिन, मेयर चुनाव में भाजपा की नमिता बुबकिया को पूरे 33 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी सुमित्रा जैन महज 3 वोटों पर सिमट गईं।
VIP सीटों पर उलटफेर: अटरू में मंत्री के भाई की हार बारां जिले की अटरू नगर पालिका का चुनाव खासा चर्चा में रहा। यहां कांग्रेस की निशा ने राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई और भाजपा प्रत्याशी कृष्ण मुरारी दिलावर को 3 वोटों के अंतर से हरा दिया। 25 सदस्यों वाली पालिका में निशा को 14 वोट मिले। वहीं, सीकर नगर परिषद में कांग्रेस की खतीजा बानो 41 वोट हासिल कर 17 वोटों के बड़े अंतर से सभापति निर्वाचित हुईं। धौलपुर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन वहां निर्दलीय गिरीश कुमार निर्विरोध सभापति बन गए।
तीसरे मोर्चे की एंट्री: बारां में AAP, नोखा में माकपा का परचम निकाय चुनावों में छोटे दलों ने भी चौंकाने वाले परिणाम दिए हैं। बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी (AAP) की शीतल राठौर ने 31 वोट हासिल कर सभापति की कुर्सी पर कब्जा जमाया। वार्ड चुनाव में भी AAP ने यहां 60 में से 31 सीटें जीती थीं। बीकानेर के नोखा में माकपा (CPI-M) के बजरंगलाल (32 वोट) और नागौर की मूंडवा नगर पालिका में RLP की अलका अध्यक्ष निर्वाचित हुई हैं।
किस जिले में कितने निकायों पर BJP का कब्जा? अध्यक्ष पदों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जयपुर जिले के 12 शहरी निकायों पर भाजपा का कब्जा हुआ है। इसी तरह पाली में 10, अलवर और चूरू में 9-9, जबकि अजमेर, भीलवाड़ा, झुंझुनूं और टोंक में 8-8 निकायों में भाजपा के अध्यक्ष बने हैं। पूरे प्रदेश के वार्ड चुनाव के वोट शेयर में भाजपा और कांग्रेस के बीच केवल 0.94% का मामूली अंतर था, लेकिन प्रमुख पदों के चुनावों में भाजपा के बेहतर राजनीतिक प्रबंधन ने उसे बड़ी बढ़त दिला दी है।