जयपुर, राजस्थान के युवाओं के सशक्तिकरण और सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार ने ‘राज्य युवा नीति–2026’ के प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारी तेज कर दी है। बुधवार को सवाई मानसिंह स्टेडियम में युवा मामले एवं खेल विभाग के शासन सचिव नीरज के पवन की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण अंतर्विभागीय समन्वय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में नीति के विजन, रणनीतिक ढांचे और 2031 तक के लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा की गई।
युवा नीति-2026 के 7 प्रमुख ‘एकीकृत फोकस क्षेत्र’
शासन सचिव ने बताया कि इस नीति के तहत 15 से 29 वर्ष के युवाओं को केंद्र में रखते हुए सात महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर कार्य किया जाएगा:
- नेतृत्व एवं सामाजिक जिम्मेदारी: युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों, स्वैच्छिक सेवा और राष्ट्र निर्माण से जोड़ना।
- डिजिटल सशक्तिकरण एवं नवाचार: डिजिटल साक्षरता और उभरती तकनीकों (AI, डेटा साइंस आदि) में युवाओं को दक्ष बनाना।
- शिक्षा एवं कौशल विकास: उद्योग की जरूरतों के अनुरूप व्यावसायिक प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा।
- रोजगार एवं उद्यमिता: स्वरोजगार, स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा और वित्तीय-संस्थागत सहयोग।
- खेल, स्वास्थ्य एवं कल्याण: फिटनेस, पोषण, खेल अवसंरचना का विकास और नशा-मुक्ति।
- संस्कृति, विरासत एवं कला: प्रदेश की समृद्ध लोक कला, पर्यटन और रचनात्मक उद्योगों से युवाओं का जुड़ाव।
- समावेशन एवं सामाजिक समानता: महिला, दिव्यांग, SC/ST और वंचित वर्ग के युवाओं को समान अवसर।
“युवा अब लाभार्थी नहीं, सहभागी बनेंगे”
नीरज के पवन ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य युवा नीति–2026 राजस्थान के युवाओं के आत्मनिर्भर भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल सरकारी योजनाओं का लाभ देना नहीं है, बल्कि उन्हें विकास प्रक्रिया का ‘सक्रिय सहभागी’ बनाना है।
अंतर्विभागीय समन्वय और निगरानी
नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बैठक में शिक्षा, चिकित्सा, सूचना प्रौद्योगिकी, महिला अधिकारिता और जनजाति क्षेत्रीय विकास सहित कई विभागों के नोडल अधिकारी मौजूद रहे। सभी विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे अपनी योजनाओं को इस नई युवा नीति के लक्ष्यों के अनुरूप संरेखित (Align) करें। वर्ष 2026 से 2031 तक के लिए निर्धारित लक्ष्यों की नियमित समीक्षा और निगरानी की जाएगी।
