गांवों में सजा चुनावी दंगल: पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण लॉटरी का शेड्यूल जारी, प्रशासनिक तैयारियां तेज

जयपुर। राजस्थान के ग्रामीण अंचलों में अब चुनावी सरगर्मियां चरम पर पहुंचने वाली हैं। प्रदेश की पंचायती राज संस्थाओं में आगामी आम चुनावों के मद्देनजर पदों के आरक्षण की लॉटरी निकालने की तिथियां घोषित कर दी गई हैं। आगामी 23 और 24 सितंबर को आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसके साथ ही गांवों में चुनावी रण पूरी तरह से सज जाएगा। पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया को 15 नवंबर तक संपन्न कराने का लक्ष्य रखा गया है।

23 और 24 सितंबर को तय होगा सीटों का गणित

पंचायती राज संस्थाओं के विभिन्न पदों के लिए आरक्षण लॉटरी दो चरणों में निकाली जाएगी:

  • 23 सितंबर (जिला स्तर की लॉटरी): पहले दिन जिला मुख्यालयों पर लॉटरी प्रक्रिया संपन्न होगी। इसमें जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य तथा प्रधान पदों के लिए वर्गवार (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिला) आरक्षण निर्धारित किया जाएगा।
  • 24 सितंबर (उपखंड स्तर की लॉटरी): दूसरे दिन उपखंड (एसडीएम) स्तर पर लॉटरी निकाली जाएगी। इस दौरान ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं वार्ड पंच पदों के लिए आरक्षण का पिटारा खुलेगा।

आरक्षण तय होते ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस गांव या वार्ड से किस वर्ग का प्रत्याशी चुनाव मैदान में ताल ठोक सकेगा।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी सक्रियता

गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा 20 जुलाई को दिए गए अहम आदेश के बाद से ही चुनाव प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने की कवायद तेज हो गई थी। हाईकोर्ट के निर्देशों की अनुपालना में पंचायती राज विभाग और राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारियों को गति दी है। इसी क्रम में 13 अगस्त को जिला प्रमुख पदों के आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है।

15 नवंबर तक चुनाव संपन्न कराने का लक्ष्य, प्रशासनिक निर्देश जारी

पंचायती राज विभाग ने चुनाव को तय समय सीमा—15 नवंबर तक—संपूर्ण रूप से पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए विभाग की ओर से समस्त जिला कलेक्टरों एवं उपखंड अधिकारियों (SDM) को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अधिकारियों को आरक्षण लॉटरी पारदर्शी तरीके से, जनप्रतिनिधियों एवं आमजन की मौजूदगी में वीडियोग्राफी के साथ कराने के निर्देश दिए गए हैं।

लॉटरी की तिथियां सामने आते ही ग्रामीण क्षेत्रों में चौपालों की चर्चाएं तेज हो गई हैं और संभावित प्रत्याशियों ने अपनी-अपनी गोटियां बिठाना शुरू कर दिया है। आरक्षण तय होने के बाद ही उम्मीदवारों के चेहरे पूरी तरह साफ होंगे।


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