21 करोड़ का राजगढ़ वन घोटाला: क्या पीके उपाध्याय के हाथ से फिसलेगी राजस्थान वन प्रमुख की कुर्सी?

जयपुर: राजस्थान में नए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (PCCF-HoFF) की नियुक्ति से ठीक पहले एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस शीर्ष पद के प्रमुख दावेदार पीके उपाध्याय के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) में परिवाद दर्ज किया गया है। यह शिकायत अलवर के राजगढ़ वन क्षेत्र में हुए करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय घोटाले और उसकी जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई में जानबूझकर देरी करने के आरोपों से जुड़ी है।

नियुक्ति बैठक से पहले बड़ा झटका

मौजूदा पीसीसीएफ-हॉफ अरिजीत बनर्जी आगामी 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उनके उत्तराधिकारी के चयन के लिए मंगलवार को एक अहम चयन समिति की बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में पीके उपाध्याय के साथ-साथ शिखा मेहरा और अनुराग भारद्वाज के नामों पर भी विचार किया जाना है। लेकिन बैठक से ठीक पहले 20 सितंबर को एसीबी में शिकायत दर्ज होने से उपाध्याय की दावेदारी बेहद कमजोर हो गई है।

क्या है राजगढ़ वन घोटाला मामला?

यह पूरा विवाद अलवर जिले की राजगढ़ रेंज में वन समितियों के माध्यम से कराए गए कार्यों में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि इस दौरान करीब 17 से 21 करोड़ रुपये का गबन किया गया।

तत्कालीन विभागीय जांच अधिकारी राजीव चतुर्वेदी ने अपनी रिपोर्ट में इस पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए इसे एसीबी (ACB) को सौंपने की सिफारिश की थी। आरोप है कि इस सिफारिश पर करीब 17 महीने तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और फाइल को दबाए रखा गया। इसके साथ ही मूल जांच अधिकारी को भी पद से हटाने के आरोप लगे हैं। गौरतलब है कि उस दौरान पीके उपाध्याय पीसीसीएफ (प्रशासन) और वन बल प्रमुख का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।

मुख्य सचिव को भेजा गया कानूनी प्रतिवेदन

इस मामले में शिकायतकर्ता और पर्यावरणविद् तपेश्वर सिंह भाटी ने राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को एक कानूनी प्रतिवेदन भी भेजा है। भाटी ने अपनी मांग में स्पष्ट कहा है कि जब तक राजगढ़ घोटाले से जुड़े तथ्यों की पूरी समीक्षा नहीं हो जाती और जांच पूरी नहीं होती, तब तक पीके उपाध्याय के नाम पर वन प्रमुख के पद के लिए विचार न किया जाए। साथ ही, उन्हें इस पद का अंतरिम प्रभार भी नहीं सौंपा जाना चाहिए।

पहले भी टल चुकी है चयन समिति की बैठक

यह पहली बार नहीं है जब इस पद पर नियुक्ति को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले 24 सितंबर को भी पीसीसीएफ-हॉफ के चयन के लिए समिति की बैठक प्रस्तावित थी, जिसे ‘अपरिहार्य कारणों’ का हवाला देते हुए ऐन मौके पर स्थगित कर दिया गया था। उस समय भी बैठक से ठीक पहले पर्यावरणविद् भाटी ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में दर्ज शिकायत का हवाला दिया था।

अब देखना यह होगा कि मंगलवार को होने वाली चयन समिति की बैठक में सरकार एसीबी में दर्ज इस ताज़ा शिकायत को किस तरह लेती है और राजस्थान के अगले वन प्रमुख का ताज किसके सिर सजता है।


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