राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित जलदाय विभाग के मुख्यालय ‘जलभवन’ में अपनी वाजिब मांगों को लेकर धरने पर बैठे ठेकेदारों का आंदोलन अब उग्र रूप लेता जा रहा है। आज 20 अप्रैल 2026 को ठेकेदारों के अनिश्चितकालीन धरने का 8वां दिन है। ठेकेदार संघर्ष समिति ने सरकार को भुगतान के लिए आज तक का अल्टीमेटम दिया था, जिसकी समय सीमा समाप्त होने के साथ ही अब प्रदेशभर में पेयजल व्यवस्था चरमराने का खतरा मंडरा रहा है।

33 महीनों का लंबा इंतजार और आर्थिक बदहाली
ठेकेदारों का आरोप है कि पिछले 33 महीनों से जल जीवन मिशन (JJM) का भुगतान नहीं मिला है, जिससे वे गहरे वित्तीय संकट में फंस गए हैं। इसके अलावा:
- सरकार पर 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा के GST का भुगतान बकाया है।
- अमृत-2.0 योजना के तहत किए गए कार्यों का 900 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। इन परिस्थितियों के कारण ठेकेदारों के लिए अब काम जारी रखना असंभव हो गया है और उनके सब्र का बांध टूट रहा है।
आज की बैठक में तय होगा ‘रणनीति’ का ब्लूप्रिंट
ठेकेदार संघर्ष समिति आज जलभवन परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर रहे है। इस बैठक में आगे की रणनीति पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। यदि सरकार ने आज शाम तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया या उनकी सुनवाई नहीं की, तो कल (21 अप्रैल) से ठेकेदार ‘आर-पार’ की लड़ाई शुरू कर देंगे।

कल पेयजल सप्लाई बंद रखने की चेतावनी
आंदोलन के अगले चरण में ठेकेदारों ने घोषणा की है कि कल प्रदेशभर में 2 घंटे तक पेयजल सप्लाई बंद रखी जा सकती है। यदि इसके बाद भी समाधान नहीं निकला, तो इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है और पूरे प्रदेश में जलापूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।
ठेकेदारों का कहना है कि वे पिछले 8 दिनों से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन प्रशासन और सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने के कारण उन्हें अब यह कड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
