राजस्थान के किसानों की तकदीर बदल रहा ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड’: मिट्टी की सेहत जानकर कर रहे वैज्ञानिक खेती, खाद का खर्च घटा और मुनाफे में हुई बढ़ोतरी

जयपुर: राजस्थान में कृषि को लाभ का धंधा बनाने और किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना’ (Soil Health Card Scheme) एक गेम-चेंजर साबित हो रही है। राज्य सरकार द्वारा केंद्र के सहयोग से चलाई जा रही इस योजना के माध्यम से किसानों को उनके खेत की मिट्टी की सेहत की सटीक जानकारी मिल रही है, जिससे वे वैज्ञानिक तरीके से खेती कर पा रहे हैं और अनावश्यक उर्वरकों (खाद) पर होने वाले खर्च को बचा रहे हैं।

क्या है मृदा स्वास्थ्य कार्ड? (What is Soil Health Card) जिस तरह इंसान के स्वास्थ्य की जांच के लिए मेडिकल रिपोर्ट होती है, ठीक उसी तरह खेत की जमीन की सेहत बताने के लिए ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड’ जारी किया जाता है। यह एक प्रकार का रिपोर्ट कार्ड होता है, जिसमें खेत की मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति और उसमें मौजूद कमियों की विस्तृत जानकारी होती है।

इस कार्ड के जरिए किसान को यह पता चलता है कि उसकी जमीन में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश जैसे मुख्य तत्वों के अलावा जिंक, आयरन, कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कितनी मात्रा है और मिट्टी का पीएच (pH) स्तर क्या है।

योजना का मुख्य उद्देश्य और किसानों को लाभ कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अक्सर जानकारी के अभाव में किसान खेतों में यूरिया, डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध इस्तेमाल करते हैं। इससे न केवल खेती की लागत बढ़ती है, बल्कि जमीन की उर्वरा शक्ति भी धीरे-धीरे नष्ट होने लगती है।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड इस समस्या का समाधान करता है। कार्ड में मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह सिफारिश की जाती है कि किस फसल के लिए कितनी मात्रा में और कौन सा खाद डालना चाहिए।

  • लागत में कमी: सही मात्रा में खाद के उपयोग से किसानों का उर्वरकों पर होने वाला अतिरिक्त खर्च बच जाता है।
  • उत्पादन में वृद्धि: संतुलित पोषक तत्व मिलने से फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में बढ़ोतरी होती है।
  • मिट्टी की सेहत में सुधार: रसायनों के सीमित उपयोग से जमीन का उपजाऊपन लंबे समय तक बना रहता है।

कैसे होती है मिट्टी की जांच और कार्ड बनने की प्रक्रिया? इस योजना के तहत कृषि विभाग के कर्मचारी या प्रशिक्षित सहायक किसानों के खेत पर जाकर मिट्टी के नमूने (Soil Samples) एकत्रित करते हैं। इन नमूनों को राज्य की विभिन्न मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं (Soil Testing Labs) में भेजा जाता है।

लैब में वैज्ञानिकों द्वारा मिट्टी की गहन जांच की जाती है। जांच के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार होती है, जिसे ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड’ के रूप में किसान को निशुल्क प्रदान किया जाता है। सामान्यतः हर 3 साल में खेत की मिट्टी की पुनः जांच कर नया कार्ड जारी करने का प्रावधान है, ताकि मिट्टी में आए बदलावों का पता चल सके।

12 मापदंडों पर होती है जांच मृदा स्वास्थ्य कार्ड में मिट्टी के 12 महत्वपूर्ण मापदंडों (Parameters) की जानकारी दी जाती है:

  1. मुख्य पोषक तत्व: नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P), पोटैशियम (K)
  2. द्वितीयक पोषक तत्व: सल्फर (S)
  3. सूक्ष्म पोषक तत्व: जिंक (Zn), आयरन (Fe), कॉपर (Cu), मैंगनीज (Mn), बोरॉन (B)
  4. भौतिक मापदंड: पीएच (pH), विद्युत चालकता (EC), जैविक कार्बन (OC)

किसान यहां कर सकते हैं संपर्क जो किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच करवाना चाहते हैं या जिन्हें अभी तक मृदा स्वास्थ्य कार्ड नहीं मिला है, वे अपने नजदीकी कृषि पर्यवेक्षक (Agriculture Supervisor), सहायक कृषि अधिकारी या जिला कृषि विभाग के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, किसान ई-मित्र केंद्र या कृषि विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। सरकार का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक किसान के हाथ में उसके खेत का स्वास्थ्य कार्ड पहुंचाना है।

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