जयपुर। राजस्थान में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को महीनों तक पदस्थापन की प्रतीक्षा (APO – Awaiting Posting Orders) में रखकर उनकी नियुक्ति लटकाने और प्रताड़ित करने का खेल अब बंद होने जा रहा है। प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में अफसरों की मनमानी को रोकने और राज्य कोष पर पड़ रहे अनावश्यक वित्तीय भार को थामने के लिए वित्त विभाग ने एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक गाइडलाइन जारी की है।
वित्त विभाग की विशेष सचिव शिवांगी स्वर्णकार द्वारा जारी इस नए सर्कुलर के तहत अब किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को 30 दिन से अधिक समय तक एपीओ नहीं रखा जा सकेगा। यह नया आदेश ‘राजस्थान सेवा नियम 1951’ के नियम 25-ए के तहत जारी किया गया है।
क्यों पड़ी इस कड़े आदेश की जरूरत?
सरकार ने आधिकारिक रूप से माना है कि पूर्व में जारी वर्ष 1981, 1984 और 2007 के प्रशासनिक आदेशों की धड़ल्ले से अवहेलना की जा रही थी। अधिकारी अपनी पसंद-नापसंद के आधार पर कर्मचारियों को एपीओ कर देते थे। नियमों के विरुद्ध किए जा रहे ये एपीओ आदेश लगातार माननीय हाईकोर्ट द्वारा रद्द किए जा रहे थे, जिससे सरकार की किरकिरी हो रही थी। इसके अलावा, कर्मचारी संगठनों की भी यह पुरानी मांग थी कि एपीओ के नाम पर कर्मचारियों का प्रशासनिक शोषण बंद होना चाहिए।
नए नियमों के मुख्य प्रावधान: तय हुई 30 दिन की ‘लक्ष्मण रेखा’
वित्त विभाग के इस नए फरमान में कई कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं, जिससे अब प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी:
- 30 दिन की सीमा: एपीओ की अधिकतम अवधि 30 दिन होगी। यदि किसी विशेष परिस्थिति में इस अवधि को बढ़ाना है, तो ठोस कारणों के साथ ‘चेक लिस्ट’ लगाकर पहले वित्त विभाग (Finance Department) से विधिक मंजूरी लेनी होगी।
- जवाबदेही और डीओ लेटर (DO Letter): यदि 30 दिन में पोस्टिंग आदेश जारी नहीं होते हैं, तो संबंधित विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) या प्रमुख शासन सचिव को हर महीने मुख्य सचिव (CS) और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव को ‘डीओ लेटर’ भेजकर जवाब देना होगा। इसमें प्रभावित कर्मचारी का नाम, पद और एपीओ की कुल अवधि का स्पष्ट उल्लेख करना होगा।
- मुख्य सचिव स्तर पर मॉनिटरिंग: मुख्य सचिव हर तिमाही (Quarterly) राज्य के सभी एपीओ मामलों की विस्तृत समीक्षा करेंगे और इस पूरी रिपोर्ट को CMIS (Chief Minister Information System) पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाएगा।
- सजा का विकल्प नहीं: एपीओ को किसी भी सूरत में कर्मचारी के खिलाफ सजा या अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) के शॉर्टकट विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। कर्मचारी को एपीओ करने का ठोस प्रशासनिक कारण बताना अब अनिवार्य होगा।
छुट्टी और डेपुटेशन को लेकर भी नए नियम लागू
- अवकाश के साथ पोस्टिंग: अब किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लंबी छुट्टी (Leave) मंजूर करते समय ही उसके आगामी पोस्टिंग स्थान का उल्लेख आदेश में करना होगा। छुट्टी खत्म होने से पहले ही उसकी जॉइनिंग के आदेश लाइव हो जाएंगे।
- प्रतिनियुक्ति से वापसी: प्रतिनियुक्ति (Deputation) या किसी ट्रेनिंग से लौटने के न्यूनतम 15 दिन पहले ही संबंधित कार्मिक के पोस्टिंग आदेश जारी करने होंगे। ट्रांसफर होने पर कर्मचारियों को जॉइनिंग से रोकने का खेल अब पूरी तरह बंद होगा।
इस फैसले से न केवल अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी, बल्कि बिना काम किए घर बैठे वेतन उठाने वाले कार्मिकों के कारण राज्य सरकार पर पड़ रहा करोड़ों रुपये का आर्थिक बोझ भी समाप्त होगा।