जयपुर। परीक्षा हॉल में पिन ड्रॉप साइलेंस था। हर कोई अपनी ओएमआर शीट भरने में व्यस्त था। इनवेजिलेटर एडमिट कार्ड चेक कर रहे थे। फोटो मिली, हस्ताक्षर मिले और चेहरे पर तनाव भी असली परीक्षार्थी जैसा ही था। लेकिन, उस चेहरे के पीछे छिपा सच किसी को नजर नहीं आया। वह शख्स वो नहीं था, जिसका नाम एडमिट कार्ड पर लिखा था। यह राजस्थान की परीक्षा प्रणाली में बैठा वो ‘भूत’ (Ghost Candidate) था, जो किसी और की किस्मत लिखने आया था। SOG की फाइलों ने जब इस राज से पर्दा उठाया, तो पूरा सिस्टम हिल गया। पेपर लीक माफिया की कमर तोड़ने के बाद स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के सामने अब एक और भयानक चुनौती आ खड़ी हुई है। जांच में एक ऐसा अंडरग्राउंड नेटवर्क सामने आया है, जिसमें 2000 से ज्यादा ‘डमी कैंडिडेट’ सक्रिय हैं। ये वो लोग हैं जो पिछले कुछ सालों से असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देकर सिस्टम को धोखा दे रहे थे।

14 बड़ी परीक्षाओं में सेंधमारी
SOG की अब तक की जांच में खुलासा हुआ है कि इस माफिया ने प्रदेश की 14 बड़ी भर्ती परीक्षाओं की शुचिता को तार-तार कर दिया है। सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती, वनपाल, रीट (REET) और पटवारी जैसी संवेदनशील परीक्षाओं में इस गिरोह की जड़ें मिली हैं। अब तक की कार्रवाई में 125 डमी कैंडिडेट को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, लेकिन असली संख्या इससे कहीं ज्यादा डरावनी है। कई ऐसे अभ्यर्थी भी चिन्हित किए गए हैं जो सरकारी नौकरी में लग चुके हैं, लेकिन उनकी जगह परीक्षा किसी और ने दी थी।
प्रतिभा का सौदा: 10 लाख में बिका ईमान
इस पूरे खेल की बुनियाद ‘मोटे पैसे’ पर टिकी है। जांच में सामने आया है कि डमी कैंडिडेट बनने वाले कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि पढ़ने में बेहद होनहार छात्र हैं। एक परीक्षा में बैठने का रेट 8 से 10 लाख रुपये तय होता है। अगर कोई डमी कैंडिडेट साल भर में चार से पांच परीक्षाओं में बैठ जाता है, तो उसकी कमाई 40 से 45 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। इसी काली कमाई की चमक ने कई होनहारों को अपराधी बना दिया और उन्होंने अपना जमीर बेच दिया।
RAS बनने का सपना और अपराध का रास्ता
हैरानी की बात यह है कि इस गिरोह में शामिल युवा खुद बड़ी सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे थे। हाल ही में SOG ने फलौदी के रहने वाले अशोक कुमार को गिरफ्तार किया, जिस पर 50 हजार का इनाम था। अशोक खुद RAS (राजस्थान प्रशासनिक सेवा) की तैयारी कर रहा था और पढ़ाई में काफी तेज था। लेकिन पैसों के लालच में उसने डमी कैंडिडेट बनना स्वीकार किया और चार अलग-अलग परीक्षाओं में दूसरों की जगह बैठकर परीक्षा दी। अब वह सलाखों के पीछे अपने किए की सजा भुगत रहा है।

फर्जीवाड़े का हाईटेक तरीका
यह गिरोह पुराने सिस्टम की हर खामी का फायदा उठाना जानता था। डमी कैंडिडेट को परीक्षा में बैठाने के लिए असली अभ्यर्थी के एडमिट कार्ड पर फोटो मिक्सिंग (Morphing) की जाती थी, ताकि चेहरा दोनों से मिलता-जुलता लगे। इसके अलावा, जाली आधार कार्ड और हस्ताक्षर में हेराफेरी कर ये लोग परीक्षा केंद्रों में घुस जाते थे। पहले बायोमेट्रिक जांच की सख्ती न होने के कारण ये आसानी से बच निकलते थे।
सिस्टम का ‘एंटी-वायरस’ एक्टिव

एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) विशाल बंसल के मुताबिक, अब इस खेल को खत्म करने के लिए पूरी ताकत लगा दी गई है। परीक्षा एजेंसियों ने पैटर्न बदल दिया है। अब लाइव फोटो कैप्चर, फेस रिकग्निशन और आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। SOG का संदेश साफ है—चाहे वह पेपर लीक माफिया हो या डमी कैंडिडेट, कानून के लंबे हाथों से कोई नहीं बच पाएगा।
