राजस्थान डिजिफेस्ट 2026: ‘एल्गोरिथम विद सोल’— एआई से आसान हुआ जीवन, भारतीय युवाओं के नवाचारों की दुनिया ने मानी ताकत

जयपुर, जयपुर के सीतापुरा स्थित जेईसीसी (JECC) में चल रहे राजस्थान डिजिफेस्ट-टाई ग्लोबल समिट 2026 के दूसरे दिन सोमवार को तकनीकी और सृजनात्मकता के संगम पर विशेष चर्चा हुई। मुख्य हॉल में आयोजित पैनल डिस्कशन ‘एल्गोरिथम विद सोल- क्रिएटिविटी इन द ऐज ऑफ एआई’ (एआई के युग में रचनात्मकता) के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि एआई केवल एक मशीन नहीं, बल्कि मानवीय क्षमताओं को विस्तार देने वाला सशक्त माध्यम है।

तकनीक को सरल बना रहे हैं भारतीय युवा

सत्र के दौरान डाइनो के सीईओ, राज जसवा ने भारतीय युवाओं की तकनीकी प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि एआई के क्षेत्र में भारत के युवाओं ने वैश्विक स्तर पर ढेरों नवाचार किए हैं। उन्होंने एआई के व्यावहारिक लाभों पर प्रकाश डाला:

  • सुलभ सेवाएं: लेखन, फोटो एडिटिंग और ईमेल ड्राफ्टिंग जैसे कठिन कार्य अब कुछ ही सेकंड्स में संभव हैं।
  • भाषा की बाधा खत्म: एआई ने लैंग्वेज लर्निंग (भाषा सीखना) को बेहद आसान बना दिया है, जिससे वैश्विक संवाद सुगम हुआ है।
  • गवर्नेंस में एआई: सरकारी योजनाओं में एआई चैटबॉट्स के माध्यम से अब पात्र व्यक्तियों को उनकी समस्याओं का समाधान घर बैठे मिल रहा है।

एआई: नवाचार और सकारात्मक बदलाव का वाहक

जेनस्पार्क के को-फाउंडर लेंजॉय लिन ने एआई के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स की उपयोगिता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज हमारे पास ऐसे टूल्स उपलब्ध हैं जो शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और उद्योग जगत में क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं।

“आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने क्लिष्ट (जटिल) चीजों को सरल कर दिया है। यदि इन तकनीकों का सही दिशा में उपयोग किया जाए, तो परिणाम न केवल प्रभावी होंगे बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए लाभकारी साबित होंगे।”

चर्चा का सारांश

सत्र का संचालन डाटा ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय डाटा ने किया। चर्चा का मुख्य निष्कर्ष यह रहा कि एआई के युग में ‘क्रिएटिविटी’ और ‘सोल’ (आत्मा) का होना जरूरी है, ताकि तकनीक का उपयोग मानवीय संवेदनाओं के साथ नवाचार को बढ़ावा देने के लिए किया जा सके।

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