Expose Now Exclusive: “पधारो म्हारे देस” की धरती पर मंडराता खौफ, 2 सालों में 2900 से ज्यादा हत्याएं और 2700 से ज्यादा लूट…..राजस्थान बना अपराध का नया केंद्र, आखिर कहां गया कानून का डर?

-सुशासन के दावों की उड़ी धज्जियां: 2024 और 2025 के सरकारी आंकड़े दे रहे गवाही, प्रदेश में सरेराह छिन रही जिंदगियां और लुट रही गाढ़ी कमाई

-बेखौफ अपराधी, लाचार खाकी: पुलिस मुख्यालय के आदेश सिर्फ फाइलों में कर रहे गश्त, खौफ के सौदागरों के आगे नतमस्तक हुआ सिस्टम

‘Expose Now’ की बेबाक महा-पड़ताल: तथ्यों और आंकड़ों के साथ जानिए क्या आपका अपना जिला सुरक्षित है?, बिन्दुवार रिपोर्ट में देखिए हत्या और लूट के वे डरावने आंकड़े, जो रातों की नींद उड़ा देंगे

जयपुर। शांत, ‘पधारो म्हारे देस’ जैसी अतिथि सत्कार वाली संस्कृति वाला राजस्थान प्रदेश अब तेजी से अपराध का एक नया और खौफनाक केंद्र बनता जा रहा है। रेत के धोरों और ऐतिहासिक किलों के लिए दुनियाभर में मशहूर इस राज्य की फिजाओं में अब बारूद की गंध और खौफ पसरने लगा है। कभी अपनी शांति और सुशासन के लिए पहचाने जाने वाले राजस्थान की सड़कों पर अब खून बह रहा है, और आम आदमी का घर से निकलना मुहाल हो गया है। ‘Expose Now’ की इस विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में जो आंकड़े हम आपके सामने रखने जा रहे हैं, वे न केवल चौंकाने वाले हैं, बल्कि कानून-व्यवस्था के दावों की भी पोल खोलते हैं। वर्ष 2024 से लेकर 2025 के आंकड़े यह गवाही दे रहे हैं कि अपराधियों में पुलिस और कानून का कोई खौफ नहीं बचा है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में जिस तरह से हत्या, लूट और डकैती के मामलों की बाढ़ आई है, उसने पूरे सिस्टम पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। राजस्थान का हर संभाग, हर जिला अब अपराध की आग में जल रहा है। आइए, बिन्दुवार और आंकड़ों के साथ देखते हैं कि कैसे राजस्थान की शांति को अपराधियों ने बंधक बना लिया है।

हत्या(Murder), खून से लाल होती राजस्थान की धरती:-

प्रदेश में हत्याओं का ग्राफ इस कदर बढ़ा है कि इंसान की जान की कीमत मानो खत्म सी हो गई है। आपसी रंजिश, गैंगवार और छोटी-छोटी बातों पर दिनदहाड़े लोगों को मौत के घाट उतारा जा रहा है।

-वर्ष 2024 में राजस्थान के विभिन्न थानों में हत्या के कुल 1607 खौफनाक मामले दर्ज किए गए।

-अगले ही साल, यानी वर्ष 2025 में भी हत्याओं का यह सिलसिला थमा नहीं और प्रदेश में 1314 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई।

-उदयपुर, जिसे झीलों की नगरी कहा जाता है, हत्याओं के मामले में सबसे संवेदनशील जिला बनकर उभरा है। वर्ष 2024 में यहां सर्वाधिक 96 हत्याएं दर्ज की गईं।

-वर्ष 2025 में भी उदयपुर में हत्या के 62 मामले सामने आए, जो पुलिस की लचर कार्यप्रणाली को दर्शाते हैं।

-राजधानी जयपुर, जो सत्ता का केंद्र है, वहां भी अपराधी बेखौफ हैं। जयपुर कमिश्नरेट क्षेत्र में 2024 में 99 और 2025 में 95 हत्या की वारदातें अंजाम दी गईं।

-बीकानेर जिले में 2024 में 80 लोगों को मौत की नींद सुला दिया गया। बीकानेर में वर्ष 2025 में भी 50 हत्या के मामले दर्ज हुए।

-अलवर जिले में भी अपराधियों ने जमकर तांडव मचाया, जहां 2024 में 64 और 2025 में 55 हत्या के प्रकरण दर्ज किए गए।

-शेखावाटी का सीकर जिला भी अपराध की इस आंधी से अछूता नहीं रहा; यहां 2024 में 54 और 2025 में 45 हत्याएं हुईं।

-श्रीगंगानगर जिले में 2024 में हत्या के 58 मामले पुलिस थानों में दर्ज किए गए।

-वर्ष 2025 में श्रीगंगानगर में हत्या के 39 प्रकरण दर्ज हुए।

-भीलवाड़ा, जिसे राजस्थान की वस्त्र नगरी कहा जाता है, वहां भी 2024 में 49 और 2025 में 35 हत्या की घटनाएं दर्ज की गईं।

लूट(Robbery), राहजनी और छीनाझपटी से सहमी जनता:-

लूट और राहजनी की घटनाओं ने प्रदेश के व्यापारियों, महिलाओं और आम नागरिकों की रातों की नींद उड़ा दी है। चैन स्नैचिंग, मोबाइल लूट और सरेराह हथियार दिखाकर नकदी लूटने की घटनाएं अब आम हो चुकी हैं।

-आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 में पूरे राजस्थान में लूट के कुल 1800 डरावने मामले दर्ज किए गए।

-वर्ष 2025 में पुलिस थानों में लूट के कुल 983 प्रकरण सामने आए, लेकिन आम जनता में दहशत ज्यों की त्यों बनी रही।

-झीलों की नगरी उदयपुर में लुटेरों का सबसे ज्यादा आतंक देखने को मिला। वर्ष 2024 में यहां रिकॉर्ड 158 लूट की वारदातें हुईं।

-उदयपुर में वर्ष 2025 में भी लूट के 89 मामले दर्ज किए गए।

-राजधानी जयपुर के अलग-अलग हिस्सों में लुटेरों ने पुलिस की नाकेबंदी को धता बताते हुए जमकर लूटपाट की। जयपुर शहर (दक्षिण) में 2024 में 79 और 2025 में 58 लूट की घटनाएं हुईं।

-जयपुर शहर (पूर्व) में भी 2024 में 75 और 2025 में 48 लूट के मामले थानों की फाइलों में दर्ज हुए।

-जयपुर (पश्चिम) इलाके में 2024 में 55 और 2025 में 21 लूट के मामले सामने आए।

-मारवाड़ के अहम जिले पाली में भी लुटेरों ने जमकर आतंक मचाया, जहां 2024 में 66 लूट की वारदातें दर्ज की गईं।

-वर्ष 2025 में पाली में लूट के 45 मामले दर्ज हुए।

-अजमेर जैसे पवित्र और ऐतिहासिक शहर में भी 2024 में 54 लूट की वारदातें हुईं।

-अजमेर में 2025 में लूट के 29 प्रकरण दर्ज किए गए।

-भरतपुर रेंज के करौली जिले में 2024 में 47 और 2025 में 30 लूट की वारदातें सामने आईं।

डकैती (Dacoity), हथियारबंद गिरोहों का बढ़ता खौफ:-

डकैती जैसे गंभीर और जघन्य अपराध, जो अमूमन गिरोह बनाकर हथियारों के दम पर किए जाते हैं, वे भी राजस्थान में तेजी से सिर उठा रहे हैं। घरों, पेट्रोल पंपों और हाईवे पर टोल नाकों के आस-पास डकैतों ने अपना खौफ कायम कर लिया है।

-वर्ष 2024 में प्रदेश भर में डकैती के कुल 124 जघन्य मामले सामने आए।

-वर्ष 2025 में डकैती के 77 प्रकरण पुलिस थानों में दर्ज किए गए।

-जयपुर शहर (दक्षिण) में डकैतों ने दुस्साहस दिखाते हुए 2024 में सर्वाधिक 10 वारदातें अंजाम दीं।

-वर्ष 2025 में जयपुर शहर (दक्षिण) में डकैती के 5 मामले दर्ज हुए।

-जयपुर शहर (पूर्व) में भी 2024 में डकैती के 7 और 2025 में 2 मामले सामने आए।

-सीमावर्ती और नहरी इलाके श्रीगंगानगर में 2024 में डकैती की 6 वारदातें दर्ज की गईं।

-बीकानेर जिले में डकैतों ने 2024 में 6 और 2025 में 5 डकैती की वारदातों को अंजाम दिया।

-शेखावाटी के झुंझुनू जिले में 2024 में 6 डकैती के मामले दर्ज किए गए।

-भरतपुर रेंज के डीग जिले में भी 2024 में 5 और 2025 में 3 डकैती की घटनाएं घटीं।

-उदयपुर जिले में 2024 में डकैती के 5 मामले और 2025 में 2 मामले पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हुए।

-धौलपुर, जो पूर्व में डकैतों की शरणस्थली माना जाता था, वहां आज भी यह अपराध जिंदा है। वर्ष 2024 में वहां डकैती के 5 मामले दर्ज हुए।

महिलाओं और वंचित वर्गों पर भी अत्याचार चरम पर:-

‘Expose Now’ की पड़ताल में हत्या और लूट के अलावा महिलाओं और दलितों पर हो रहे अत्याचारों के भयावह आंकड़े भी सामने आए हैं। यह साबित करता है कि अपराधियों की नजर में कोई भी वर्ग सुरक्षित नहीं है।

-वर्ष 2024 में प्रदेश में बलात्कार के 6482 मामले सामने आए, जो महिला सुरक्षा के खोखले दावों की सच्चाई बताते हैं।

-वर्ष 2025 में भी बलात्कार की 5602 शर्मनाक वारदातें पुलिस थानों में दर्ज हुईं।

-दलितों (अनुसूचित जाति) पर अत्याचार के 2024 में 7008 और 2025 में 5921 मामले दर्ज किए गए, जो समाज के एक बड़े वर्ग में असुरक्षा की भावना पैदा कर रहे हैं।

-राहजनी की घटनाएं भी 2024 में 750 और 2025 में 756 दर्ज की गईं।

कागजों में दौड़ती पुलिसिंग और दिशा-निर्देशों की हकीकत:-

‘Expose Now’ ने पुलिस मुख्यालय से जारी होने वाले उन आदेशों और परिपत्रों की भी पड़ताल की, जो अपराध रोकने के लिए जारी तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर दम तोड़ देते हैं। पुलिस मुख्यालय ने यह खुद माना है कि रात्रि गश्त व्यवस्था पुख्ता और कारगर नहीं है, जिसके कारण वाहन चोरी और संपत्ति संबंधी अपराधों पर रोक नहीं लग पा रही है। कई बार यह पाया गया है कि गश्त के समय पुलिसकर्मियों का ध्यान सिर्फ अपनी हाजिरी लगाने पर होता है और हाजिरी लगने के बाद वे सोते हुए पाए जाते हैं। इसी लचर गश्त प्रणाली के कारण ही अपराधियों के हौसले बुलंद हुए हैं। अपराधों को रोकने के लिए पुलिस द्वारा जो कागजी आदेश दिए गए हैं, वे भी केवल फाइलों की शोभा बढ़ा रहे हैं। थानों और बीट स्तर पर सामुदायिक संपर्क समूहों को मजबूत करने के निर्देश दिए गए थे। यह भी आदेश जारी हुआ था कि राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर स्थित टोल नाकों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और वाहनों का डाटाबेस संधारित किया जाए। लेकिन, लगातार बढ़ती डकैती और लूट की घटनाएं यह साफ चीख-चीख कर कह रही हैं कि इन तकनीकी निगरानी प्रणालियों का जमीनी स्तर पर कोई खास असर नहीं हो रहा है।

शहरी इलाकों में किराएदारों और घरेलू नौकरों के सत्यापन के लिए धारा 144 के तहत निर्देश जारी कर पुलिस थानों में सूचना देना अनिवार्य किया गया था, ताकि बाहरी अपराधियों को शरण न मिल सके। अपराधियों की शरणस्थली जैसे शहर के बाहर निर्माणाधीन इमारतें, खण्डहरनुमा मकान, ओवर ब्रिज के नीचे के स्थान और बस स्टैंड की तलाशी के निर्देश भी पुलिस को दिए गए थे। इसके बावजूद, जयपुर, उदयपुर, और बीकानेर जैसे बड़े शहरों में जिस तरह हत्या और लूट के आंकड़े आसमान छू रहे हैं, उससे स्पष्ट होता है कि जमीनी पुलिसिंग पूरी तरह से फेल हो चुकी है। महिला सुरक्षा को लेकर भी ‘जीरो-एफ.आई.आर’ (Zero-FIR) और विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिसमें पीड़िता के बयान केवल महिला पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज करने और ई-इत्तला (इलैक्ट्रोनिक माध्यम से शिकायत) पर त्वरित कार्रवाई की बात कही गई है। लेकिन 2024 और 2025 में हजारों की संख्या में सामने आए मामलों ने साबित कर दिया है कि अपराधी अब इन कानूनों से बिल्कुल भी खौफजदा नहीं हैं।

क्या फिर से लौट पाएगी राजस्थान की शांति?

‘Expose Now’ की यह इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट महज कुछ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह उन हजारों परिवारों का दर्द है जिन्होंने अपराध की इस अंधी आग में अपनों को खोया है या अपनी जीवन भर की पूंजी गंवाई है। ‘पधारो म्हारे देस’ का नारा आज चीख-चीख कर यह पूछ रहा है कि आखिर वह शांतिपूर्ण राजस्थान कहां खो गया? आज जिस तरह से अपराधियों के गिरोह अत्याधुनिक हथियारों के साथ खुलेआम घूम रहे हैं, उससे आम नागरिक डरा और सहमा हुआ है। हर साल हजारों हत्याएं, लूट और डकैती की घटनाएं इस बात का साफ संकेत हैं कि अब केवल कागजी परिपत्रों और कार्यालयी आदेशों से काम नहीं चलने वाला। पुलिस और प्रशासन को अपनी कार्यप्रणाली में आमूलचूल बदलाव लाना होगा, बीट प्रणाली को सचमुच मजबूत करना होगा, और अपराधियों के अंदर ऐसा खौफ पैदा करना होगा कि वे राजस्थान की सीमा में प्रवेश करने से पहले भी हजार बार सोचें। जब तक पुलिस नींद से नहीं जागेगी, तब तक निर्दोषों का खून बहता रहेगा और अपराधियों का खौफ इसी तरह आम जनता को डराता रहेगा।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now


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